देश की खबरें | आरएसएस प्रमुख के भाषण का लक्ष्य सांप्रदायिक द्वेष पैदा करना है : विजयन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की समुदाय आधारित जनसंख्या असंतुलन संबंधी टिप्पणी के लिए बृहस्पतिवार को उन्हें आड़े हाथ लिया और कहा कि यह ‘‘दुष्प्रचार’’ है जिसका लक्ष्य देश में ‘‘सांप्रदायिक द्वेष उत्पन्न’ करना है।
तिरुवनंतपुरम, छह अक्टूबर केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की समुदाय आधारित जनसंख्या असंतुलन संबंधी टिप्पणी के लिए बृहस्पतिवार को उन्हें आड़े हाथ लिया और कहा कि यह ‘‘दुष्प्रचार’’ है जिसका लक्ष्य देश में ‘‘सांप्रदायिक द्वेष उत्पन्न’ करना है।
विजयन के कार्यालय द्वारा जारी बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि आरएसएस प्रमुख का विजया दशमी के दिन दिया गया बयान तथ्यों और आंकड़ों पर आधारित नहीं है बल्कि वह ‘झूठ’ है जिसका लक्ष्य आगामी चुनावों में लाभ लेना है।
भागवत ने बुधवार को कहा था कि भारत में जनसंख्या पर एक समग्र नीति बने जो सब पर समान रूप से लागू हो और किसी को छूट ना मिले। सरसंघचालक ने कहा, ‘‘जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ पंथक आधार पर जनसंख्या संतुलन भी महत्व का विषय है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।’’
विजयन ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया है कि संघ परिवार ने केवल वर्षों पुराने झूठ को दोहराया है कि निकट भविष्य में हिंदू अल्पसंख्यक बन जाएंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में विजयन ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि की गणना ‘‘कुल प्रजनन दर’’ (टीएफआर) पर की जाती है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-2019-21 के मुताबिक मुस्लिम समुदाय में यह दर अन्य धार्मिक समूहों के मुकाबले तेजी से कम हो रही है।
उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कहा कि एनएफएचएस 2019-21 में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का टीएफआर क्रमश: 1.9 और 2.3 था जबकि एनएफएचएस 2015-16 में मुस्लिमों का टीएफआर 2.6 और 1992-93 में 4.4 था।
उन्होंने बयान में दावा किया कि इस प्रकार मुस्लिम समुदाय के टीएफआर में 46.5 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि हिंदुओं के टीएफआर में 41.2 प्रतिशत की गिरावट आई है।
विजयन ने दावा किया कि जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक हिंदुओं की जनसंख्या वृद्धि दर में 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि इसी अवधि में मुस्लिमों की जनसंख्या वृद्धि में 4. 7 प्रतिशत की गिरावट आई है।
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