जरुरी जानकारी | आरजीसीए हेचरी ने मात्र एक हेक्टेयर में 15 टन सी-बास मछली का उत्पादन किया

कोच्चि, एक जून मछलीपालक किसानों को, झींगा के विकल्प के रूप में ‘सी-बास’ मछली के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्येश्य से पांडिचेरी में करईकल स्थित राजीव गांधी सेन्टर फार एक्वाकल्चर के प्रदर्शनी वाले मात्र एक हेक्टेयर के तालाब में 15 टन सीबास मछली का उत्पादन किया गया।

          आरजीसीए, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकार (एमपीईडीए) के तहत काम करता है।

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     एमपीईडीए ने यहां सोमवार को एक बयान में कहा कि कोराईकल स्थित एमपीईडीए-आरजीसीए के प्रदर्शन फार्म में एक हेक्टेयर क्षेत्र में 1.5 सेमी से 2 सेमी आकार के जरवे (बच्चे) डाले गए थे। उनसे तालाब में 1.2 किग्रा से 1.5 किग्रा औसत वजन की करीब 15 टन मछलियां तैयार हुईं।

इसमें कुल 10 महीने का समय लगा।   उत्पादन लागत 300 रुपये प्रति किलोग्राम थी और मछली को 420 रुपये से 450 रुपये प्रति किलोग्राम के फार्म गेट मूल्य पर बेचा गया था और 17 लाख रुपये का लाभ हुआ।

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     प्रदर्शन फार्म के परिणामों से उत्साहित, एमपीईडीए के अध्यक्ष के एस श्रीनिवास ने कहा, "सीबास विविध जलीय कृषि का बेहतर विकल्प है।"

     

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