जरुरी जानकारी | राजस्थान परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि की ओर अग्रसर : विशेषज्ञ

जयपुर, 15 मई ऊर्जा विशेषज्ञ जिवेश नंदन के दावा किया कि राजस्थान लागत प्रभावी परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा (वीआरई) क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि की ओर अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि अनुमान है कि 2030 तक 60 गीगावॉट से अधिक वीआरई क्षमता हो जायेगी।

एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट (टीईआरआई) के फेलो नंदन ने कहा कि भारतीय व्यवसाय आज ऐसी प्रौद्योगिकियां विकसित कर रहे हैं जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करेंगी।

नंदन ने बुधवार को राज्य में सौर और नवीकरणीय ऊर्जा पर काम करने वाले उद्योगों के लिए एक परामर्श कार्यक्रम को संबोंधित करते हुए कहा कि राजस्थान के वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा की परिवर्तनकारी क्षमता की ओर अग्रसर है।

उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए कम कार्बन नीति के रास्ते तलाशने का आग्रह किया।

उन्होंने प्रत्येक क्षेत्र के लिए अनुकूलित समाधानों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सौर ऊर्जा को वाणिज्यिक और औद्योगिक संचालन में एकीकृत करने के अवसरों पर प्रकाश डाला।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी नंदन ने राजस्थान की नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2023 पर भी प्रकाश डाला, जिसमें राज्य में टिकाऊ ऊर्जा विकास के एक महत्वपूर्ण चालक के रूप में वित्त वर्ष 2029-30 तक 90 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कृषि मांग को दिन के समय में स्थानांतरित करने और ग्रिड-स्केल बैटरी पर निर्भरता को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) लोड को एकीकृत करने की क्षमता पर जोर दिया, जिससे राजस्थान में ऊर्जा स्थिरता में वृद्धि होगी।

टेरी के एक बयान के अनुसार, ‘‘टीईआरआई के अध्ययन से पता चलता है कि 2030 तक कुल ऊर्जा मिश्रण के 35 प्रतिशत तक नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण बिना किसी अतिरिक्त सिस्टम (उत्पादन) लागत के हासिल किया जा सकता है।"

कुंज

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