देश की खबरें | राजस्थान : अस्पतालों व स्कूलों को रियायती दरों पर जमीन आवंटन की होगी जांच

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान सरकार ने रियायती दरों वाली जमीन पर बने अस्पतालों द्वारा कोरोना वायरस संक्रमितों का इलाज नहीं किए जाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू की है। इसके साथ ही उन आवंटनों की भी जांच होगी जिनमें विद्यालयों ने रियायती दरों पर जमीन लेकर भवन बना लिए लेकिन वे पात्र विद्यार्थियों को उचित लाभ देने में आनाकानी कर रहे हैं।

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जयपुर, एक जून राजस्थान सरकार ने रियायती दरों वाली जमीन पर बने अस्पतालों द्वारा कोरोना वायरस संक्रमितों का इलाज नहीं किए जाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू की है। इसके साथ ही उन आवंटनों की भी जांच होगी जिनमें विद्यालयों ने रियायती दरों पर जमीन लेकर भवन बना लिए लेकिन वे पात्र विद्यार्थियों को उचित लाभ देने में आनाकानी कर रहे हैं।

नगरीय विकास व स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने रियायती दरों पर जमीन ले चुके सामाजिक, धार्मिक, परमार्थ संस्थाओं एवं ट्रस्टों, विद्यालयों, अस्पतालों की सूची 15 दिन में मांगी है।

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उन्होंने सभी नगर निकायों, नगर सुधार न्यासों, विकास प्राधिकरणों व आवासन मण्डल से ब्यौरा देने को कहा है कि उनके द्वारा प्रदेश की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, परमार्थ संस्थाओं व ट्रस्टों, विद्यालयों, अस्पतालों को रियायती दरों पर कब-कब कितनी कितनी भूमि किस प्रयोजन के लिए आवंटित की गई। यह सूची 15 दिनों के भीतर भेजने को कहा गया है।

धारीवाल ने कहा कि नगरीय विकास विभाग यह जांच करेगा कि कौड़ियों के भाव जमीन लेने के बाद भी रसूख के कारण किन-किन सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संस्थाओं, चैरिटेबल संस्थाओं व ट्रस्टों, विद्यालयों, अस्पतालों द्वारा निर्धारित शर्तो का उल्लंघन किया गया है। इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि उनके आवंटन में किस प्रकार की अनियमितता हुई हैं।

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उन्होंने कहा कि समय समय पर नगरीय निकायों, नगर सुधार न्यासों, विकास प्राधिकरणों व आवासन मण्डल द्वारा विभिन्न संस्थाओं, विद्यालयों, अस्पतालों आदि को रियायती दरों पर भूमि का आवंटन किया जाता रहा है। यह आवंटन विभिन्न शर्तो के साथ भूमि आवंटन नीति 2015 के अन्तर्गत और इससे पूर्व की प्रभावी भूमि आवंटन नीतियों के तहत किया जाता है।

मंत्री के अनुसार प्रायः इस संबंध में शिकायतें प्राप्त होती हैं कि रियायती दरों पर संस्थाएं भूमि आवंटन कराने के बाद शर्तो के अनुसार अपने निर्धारित प्रयोजन के अनुरूप भूमि का उपयोग नहीं करती हैं। साथ ही वे निर्धारित शर्तो के अनुसार समाज के विभिन्न वर्गो को सुविधाऐं व रियायतें भी प्रदान नहीं करती हैं। यह भी देखा गया है कि निजी अस्पताल शर्तो के अनुसार निःशुल्क इलाज के लिए तैयार नहीं होते। इसी प्रकार विभिन्न विद्यालय गरीब छात्र-छात्राओं को प्रवेश नहीं देते हैं तथा आवंटित की गई भूमि का व्यावसायिक उपयोग भी कर रहे है।

उन्होंने कहा कि इसलिए भूमि आवंटन नीति के मापदण्डों के अनुसार ऐसे समस्त आवंटनों की जांच व सत्यापन कराना आवश्यक है।

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