जरुरी जानकारी | रातों-रात उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकती, टीका उत्पादन एक खास प्रक्रिया है: पूनावाला

नयी दिल्ली, तीन मई टीकाकरण के लिये राज्यों से बढ़ती मांग के बीच कोविड टीका कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने सोमवार को कहा कि रातों-रात टीके की उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ायी जा सकती। उन्होंने कहा कि टीके का उत्पादन एक खास प्रक्रिया है, जिसमें समय लगता है।

पूनावाला ने एक बयान में कहा कि एसआईआई को भारत सरकार ने अगले कुछ महीनों में टीके की 11 करोड़ खुराक के आर्डर मिले हैं जबकि कंपनी 15 करोड़ खुराक की आपूर्ति पहले ही कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा अगले कुछ महीनों में 11 करोड़ खुराक राज्यों एवं निजी अस्पतालों के लिये आपूर्ति की जाएगी। हालांकि, उन्होंने टीकों की आपूर्ति को लेकर कोई समयसीमा नहीं बतायी।

पुणे की कंपनी एसआईआई फिलहाल 6-7 करोड़ खुराक प्रति महीना बना सकती है। कंपनी इसे जुलाई तक बढ़ाकर 10 करोड़ करने की योजना बना रही है।

देश में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने के साथ देश के कई भागों में स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग धाराशायी हो गयी है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी है और उनके पास नये मरीजों को भर्ती करने के लिये पर्याप्त बिस्तर नहीं हैं।

सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिये अन्य उपायों के अलावा 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिये टीकाकरण की अनुमति दे दी है। लेकिन 18 से 44 साल के बीच के लिये टीकों की खरीद का जिम्मा राज्यों और निजी अस्पतालों पर छोड़ दिया गया है।

इसके कारण हर राज्य टीके की खरीद को लेकर एसआईआई के पास जा रहे हैं जबकि कंपनी मांग का कुछ हिस्सा ही पूरा करने में सक्षम है।

पूनावाला ने कहा, ‘‘हर कोई चाहता है कि उसे यथाशीघ्र टीका मिले।’’

पिछले सप्ताह उन्होंने कहा था कि उन पर टीके की आपूर्ति को लेकर काफी दबाव है और कुछ ‘प्रभावशाली लोग’ उन पर काफी दबाव बना रहे हैं और फोन पर आक्रमक तरीके से बात की। इसके कारण वह और उनका परिवार फिलहाल ब्रिटेन आ गया है।

पूनावाला ने कहा, ‘‘...हम इस बात को समझते हैं कि हर कोई यथाशीघ्र टीके की उपलब्धता चाहता है। हमारा प्रयास भी यही है और हम इसे हासिल करने के लिये हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हम और कठिन मेहनत करेंगे और भारत के कोविड-19 महामारी के खिलाफ अभियान को और मजबूत बनाएंगे।’’

सीरम के पास एस्ट्राजेनका पीएलसी और नोवावैक्स इंक के टीकों को बनाने का लाइसेंस हैं। लेकिन अब तक सरकार ने केवल एस्ट्राजेनका के कोविशील्ड टीके के उपयोग की ही मंजूरी दी है।

इसके अलावा सरकार ने घरेलू कंपनी भारत बॉयोटेक के टीके कोवैक्सीन के साथ रूस के स्पुतनिक-वी टीके के आपात उपोग की मंजूरी दी है।

इससे पहले, दिन में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मई, जून और जुलाई में एसआईआई कोविशील्ड की 11 करोड़ खुराक उपलब्ध कराएगी। साथ भारत बॉयोटेक इंडिया लि. को इसी दौरान टीके की 5 करोड़ खुराक के आर्डर दिये गये हैं।

फिलहाल लंदन में रह रहे पूनावाला ने कहा कि भारत की आबादी बहुत बड़ी है और सभी वयस्कों के लिये पर्याप्त खुराक का उत्पादन करना कोई आसान काम नहीं है।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘मैं कुछ चीजों को स्पष्ट करना चाहूंगा क्योंकि मेरे बयान को गलत तरीके से लिया गया है। सबसे पहले, टीका बनाना एक विशेषीकृत प्रक्रिया है, इसीलिए रातों-रात उत्पादन बढ़ाना संभव नहीं है। हमें यह भी समझने की जरूरत है कि भारत की आबादी बहुत बड़ी है। ऐसे में सभी वयस्कों के लिये पर्याप्त खुराक का उत्पादन करना कोई आसान काम नहीं है।’’

पूनावाला ने कहा कि यहां तक कि विकसित देश और कंपनियां भी उत्पादन बढ़ाने के लिये परेशान हैं जबकि उन देशों की आबादी बहुत कम है।

उन्होंने कहा कि पुणे स्थित उनकी कंपनी पिछले साल अप्रैल से सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।

पूनावाला ने कहा, ‘‘हमें हर प्रकार का समर्थन मिला है। चाहे वह वैज्ञानिक हो, नियामकीय हो या फिर वित्तीय। अभी की स्थिति के अनुसार हमें 26 करोड़ खुराक के आर्डर मिले हैं। इसमें से हम 15 करोड़ से अधिक खुराक की आपूर्ति कर चुके हैं। हमें भारत सरकार से अगले कुछ महीनों में 11 करोड़ खुराक के लिये 100 प्रतिशत भुगतान यानी 1,725.5 करोड़ रुपये पहले ही मिल चुके हैं।’’

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार उसने 11 करोड़ खुराक के लिये एसआईआई को पूरी राशि 1,732.50 करोड़ रुपये का भुगतान 28 अप्रैल को कर दिया है। वहीं भारत बॉयोटेक को 5 करोड़ कोवैक्सीन खुराक के लिये 787.50 करोड़ रुपये दिये गये हैं।

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