देश की खबरें | कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस की कार्रवाई नीतीश सरकार की फासीवादी प्रवृत्ति को दर्शाती है : मेवाणी

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पटना, 12 अप्रैल कांग्रेस की गुजरात इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने पटना में प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा लाठियों और पानी की बौछारों का इस्तेमाल करने के एक दिन बाद शनिवार को इस कार्रवाई की निंदा की और इसे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार की ‘‘फासीवादी प्रवृत्तियों’’ का प्रमाण बताया।

पुलिस ने शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर बल प्रयोग किया जो बेरोजगारी और पलायन की समस्या से निपटने में राज्य सरकार की कथित नाकामी के विरोध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आधिकारिक आवास की ओर मार्च कर रहे थे। कन्हैया कुमार समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए।

पत्रकारों से बातचीत में मेवाणी ने कहा, ‘‘पटना में प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठियों और पानी की बौछारों का इस्तेमाल बेहद निंदनीय है। पुलिस की कार्रवाई नीतीश कुमार सरकार की फासीवादी प्रवृत्ति को दर्शाती है। पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले भी दर्ज किए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दरअसल, राज्य सरकार युवाओं और राज्य के लोगों की आवाज को कुचलना चाहती है। बिहार में राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार युवा विरोधी, गरीब विरोधी, दलित विरोधी और सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर पड़े लोगों के खिलाफ है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जाति सर्वेक्षण कराने का दावा करने के बावजूद ‘‘दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को उनके वास्तविक लाभ से वंचित रखा है।’’

मेवाणी ने कहा, ‘‘हमारे शीर्ष नेता मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी लगातार देश में जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं। उनका मानना ​​है कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों को सामाजिक और आर्थिक न्याय मिलना चाहिए। इसलिए जाति जनगणना न केवल आवश्यक है, बल्कि उनकी आबादी के हिसाब से उनके अधिकारों को निर्धारित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा कि हालांकि, नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जाति जनगणना कराने से इनकार कर दिया है और नीतीश कुमार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।

मेवाणी ने कहा कि कांग्रेस तेलंगाना की तरह ही बिहार समेत पूरे देश में जाति जनगणना कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘दलितों, आदिवासियों, पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों की लड़ाई सिर्फ लाभ के लिए नहीं है, बल्कि उन्हें नीति निर्माता बनने में सक्षम बनाने के लिए है। कांग्रेस यही हासिल करना चाहती है। बिहार में ज्यादातर लोग गरीब हैं और यह पूरी तरह से नीतीश कुमार सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण है।’’

मेवाणी ने बिहार सरकार द्वारा 2023 में प्रकाशित जातिवार सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ‘‘रिपोर्ट से पता चलता है कि बिहार में 94.42 लाख से अधिक परिवारों की मासिक आय 6,000 रुपये से कम है। इसके अतिरिक्त, 81.91 लाख परिवार (29.61 प्रतिशत) की मासिक आय 6,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण संसाधन गरीबों तक नहीं पहुंच पाए हैं। बिहार सरकार ने जाति सर्वेक्षण के नाम पर लोगों को धोखा दिया है और वंचितों की प्रगति में बाधा उत्पन्न की है।’’

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