देश की खबरें | मास्क नहीं लगाने वाले प्रचारकों को प्रतिबंधित करने संबंधी याचिका का कोई औचित्य नहीं रहा: चुनाव आयोग

नयी दिल्ली, तीन मई भारत निर्वाचन आयोग ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि चूंकि विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है, ऐसे में मास्क नहीं लगाने सहित अनिवार्य दिशा-निर्देशों का बार-बार उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों और प्रचारकों के चुनाव प्रचार करने रोक लगाने का अनुरोध करने वाली याचिका का कोई औचित्य नहीं रह गया है।

चुनाव आयोग की दलील पर कोई टिप्पणी किए बगैर मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने निर्वाचन आयोग से याचिका पर जवाब देने को कहा। मामले की अगली सुनवाई अब तीन जून को होगी।

वहीं केन्द्र ने याचिका पर अपने जवाब में कहा कि उसने मार्च में ही सभी राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारों से कहा था कि वे सभी जमावड़ों में कोविड-19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज’ के चेयरमैन विक्रम सिंह ने यह याचिका विधानसभाओं के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले दायर की थी और कहा था कि केन्द्र सरकार और निर्वाचन आयोग के आदेश तथा दिशा-निर्देशों के बावजूद ‘‘चुनाव प्रचार पूरे जोर-शोर से चल रहा है और कोविड-19 प्रोटोकॉल पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।’’

केन्द्र सरकार के स्थाई वकील अनुराग अहलूवालिया के माध्यम से दायर हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा कि आपदा प्रबंधन कानून, 2005 के तहत राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारों को दिशा-निर्देश जारी करते हुए उसने हमेशा कड़ाई से प्रोटोकॉल का पालन कराने का प्रावधान रखा है।

वहीं, सिंह के वकील विराग गुप्ता ने अदालत को बताया कि चुनावों की घोषणा करते हुए निर्वाचन आयोग ने अपनी अधिसूचना में यह अनिवार्य किया था कि ‘‘चुनाव संबंधी प्रत्येक गतिविधि के दौरान प्रत्येक व्यक्ति मास्क लगाएगा’’ लेकिन राजनीतिक दलों, उनके नेताओं और प्रचारकों ने रैलियों, जनसभाओं और रोडशो आदि में इसका जमकर उल्लंघन किया।

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