देश की खबरें | सीजीएसटी अधिनियम के मुनाफाखोरी-रोधी प्रावधान को कायम रखने वाले फैसले के खिलाफ याचिका पर केंद्र को नोटिस

नयी दिल्ली, 12 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर केंद्र एवं अन्य पक्षों से जवाब तलब किया, जिसमें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम के उस प्रावधान की वैधता को बरकरार रखा गया, जिसमें कहा गया है कि जो कंपनियां कर में बचत करती हैं, उन्हें कीमत कम करना होगा।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ मेसर्स एक्सेल रसायन प्राइवेट लिमिटेड की अपील का संज्ञान लिया और केंद्रीय वित्त मंत्रालय, राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण (एनएए), इसके महानिदेशक, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड तथा जीएसटी परिषद को नोटिस जारी किये।

उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने 29 जनवरी को दिये अपने फैसले में सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 171 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जिसमें कहा गया है कि जो कंपनियां कर में बचत करती हैं, उन्हें कीमत कम करना होगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि 2017 के कानून और संबंधित नियमों में मुनाफाखोरी-रोधी प्रावधान लाभकारी कानून की प्रकृति में हैं क्योंकि वे उपभोक्ता कल्याण को बढ़ावा देते हैं।

उच्च न्यायालय का यह फैसला बहुराष्ट्रीय कंपनियों सहित कई प्रमुख व्यावसायिक संस्थाओं की 100 से अधिक याचिकाओं पर आया। इनमें फिलिप्स इंडिया, रेकिट बेंकिज़र, मेसर्स एक्सेल रसायन प्राइवेट लिमिटेड, जिलेट इंडिया और प्रॉक्टर एंड गैंबल होम प्रोडक्ट्स शामिल हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘(सीजीएसटी) अधिनियम, 2017 की धारा 171 के साथ-साथ (सीजीएसटी) नियमावली, 2017 के नियम 122, 124, 126, 127, 129, 133 और 134 की संवैधानिक वैधता को भी बरकरार रखा जाता है।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि धारा 171 में कहा गया है कि छोड़े गए कर को कीमत में आनुपातिक कमी के रूप में पारित किया जाना चाहिए और यह सार्वजनिक हित में शुरू किया गया एक उपभोक्ता कल्याण उपाय है।

विभिन्न कंपनियों ने एनएए द्वारा उन्हें उपभोक्ताओं के लिए कर की दर में कमी करने या इनपुट टैक्स क्रेडिट का ब्याज सहित लाभ देने का निर्देश दिए जाने के बाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि मामलों को अगले महीने उचित निर्देशों के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

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