देश की खबरें | बनभूलपुरा हिंसा के लिए दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी—कांग्रेस

देहरादून, 12 फरवरी उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने सोमवार को राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा प्रकरण में दोषी अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी ।

माहरा का यह बयान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस घोषणा पर आया है जिसमें उन्होंने कहा कि बनभूलपुरा में अतिक्रमण से मुक्त कराई गयी भूमि पर पुलिस थाना बनाया जाएगा ।

कांग्रेस नेता ने कहा, 'पुलिस थाना बनाने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन अधिकारियों को उस (अतिक्रमण हटाने के) दौरान जो सावधानियां लेनी चाहिए थीं, वे उन्होंने क्यों नहीं लीं?'

उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि जिन लोगों ने हमला किया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन इसके लिए जो अधिकारी दोषी हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए ।”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'अगर सावधानियां ली जातीं तो इतने लोग नहीं मारे जाते । ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था ।'

उन्होंने कहा कि बनभूलपुरा में माहौल खराब होने और खतरे की आशंका होने की स्थानीय खुफिया तंत्र की रिपोर्ट को अधिकारियों ने अनदेखा किया ।

माहरा ने कहा कि कार्रवाई के लिए शाम चार बजे का समय चुना गया जब अगले दो घंटे में अंधेरा होने वाला था ।

कांग्रेस नेता ने कहा कि कार्रवाई के लिए गयी टीम का नेतृत्व करने के लिए उस अधिकारी को भेजा गया जो अपने व्यवहार के कारण स्थानीय लोगों में बहुत अलोकप्रिय है ।

उन्होंने उस अधिकारी का नाम लेने से इंकार कर दिया लेकिन दावा किया कि उक्त अधिकारी पिछले 14-15 सालों से एक ही स्थान पर विभिन्न पदों पर तैनात रहा है और हाल में उसका वहां से तबादला भी हो चुका है ।

माहरा ने कहा कि कार्रवाई से पहले ड्रोन से बनभूलपुरा का सर्वेक्षण नहीं किया गया और निहत्थे निगम कर्मियों को खतरे में झोंक दिया गया ।

कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी धार्मिक स्थल को ध्वस्त करने के लिए पुलिस, पीएसी तथा अर्धसैनिक बलों को तैयार रखा जाता है और इससे पहले क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों को भरोसे में लिया जाता है जिससे हालात खराब न हों ।

उन्होंने कहा कि इस संपत्ति को पहले ही सील किया जा चुका था और इसे सील करने में क्षेत्र के जिन प्रभावशाली लोगों ने मदद की थी, उस दिन वे मेरठ गए हुए थे ।

उन्होंने कहा, 'यह बड़ा आश्चर्यजनक है कि ध्वस्तीकरण के लिए उसी दिन को क्यों चुना गया ।'

आठ फरवरी को बनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित 'मलिक का बगीचा' में बनाए गए अवैध मदरसे और नमाज स्थल के ध्वस्तीकरण के दौरान उपद्रवियों ने प्रशासनिक अमले पर हमला कर दिया था। इस दौरान पथराव व आगजनी की गयी थी तथा बनभूलपुरा थाने को भी जला दिया गया था।

इसके जवाब में पुलिस ने भी बल प्रयोग किया था, जिसमें छह व्यक्तियों की मौत हो गयी थी। हिंसा में पुलिसकर्मियों समेत 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे ।

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