देश की खबरें | एनजीटी ने एनसीजैड संबंधी बजट विवाद के समाधान का निर्देश दिया

नयी दिल्ली, सात अप्रैल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) को प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र (एनसीजैड) की स्थिति के आकलन संबंधी बजट विवाद का समाधान करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि नोडल एजेंसी होने के नाते पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को बाध्यकारी निर्णय करने के सभी अधिकार प्राप्त हैं।

इसने कहा कि मुद्दे को इस आधार पर लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए कि अंतर-विभागीय समन्वय के मुद्दे पर अधिकरण को फैसला करना चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘जनहित के विपरीत अपने दायित्व और कर्तव्य की अनदेखी कर इस तरह के मुद्दे को अधिकरण के समक्ष लाने के संबंधित विभागों के रवैये की हम प्रशंसा नहीं कर सकते।’’

इसने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय और एनसीआरपीबी को निर्देश दिया जाता है कि वे तत्काल इस अंतर-विभागीय मुद्दे का समाधान करें।

एनजीटी ने कहा कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव द्वारा किया गया निर्णय एनसीआरपीबी के लिए बाध्यकारी होगा, जब तक कि इसे किसी उचित मंच पर चुनौती नहीं दी जाती।

राष्‍ट्रीय सुदूर संवेदन केन्‍द्र (एनआरएससी) द्वारा सौंपे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि समूची कवायद में लगभग 12 महीने लगेंगे और इसपर 1.86 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी जो पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की मंजूरी का विषय होगा।

मंत्रालय ने एनजीटी से कहा कि प्रस्ताव पर लंबी चर्चा हुई और निर्णय किया गया कि चूंकि कवायद एनसीआरपीबी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले एनसीजैड की बेहतर योजना और प्रबंधन से जुड़ी है, इसलिए बजट उपलब्ध कराने के लिए एनआरएससी का प्रस्ताव एनसीआरपीबी को भेजा जा सकता है।

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