जरुरी जानकारी | वाणिज्य मंत्रालय ने पांच देशों से आयातित फाइबरबोर्ड पर प्रतिपूरक शुल्क लगाने की सिफारिश की

नयी दिल्ली, चार मई वाणिज्य मंत्रालय ने वियतनाम, मलेशिया और थाईलैंड समेत पांच देशों से आयातित फाइबरबोर्ड पर पांच साल के लिये प्रतिपूर्ति शुल्क (सीवीडी) लगाने की सिफारिश की है। इस संबंध में जारी अधिसूचना के अनुसार सब्सिडी युक्त आयात से घरेलू कंपनियों के हितों की रक्षा के लिये यह कदम उठाया गया है।

फाइबरबोर्ड एक प्रकार का लकड़ी का तैयार किया गया उत्पाद है जो लकड़ी के फाइबर से बना होता है। इसका उपयोग भवन और निर्माण, फर्नीचर, औद्योगिक और हस्तशिल्प में किया जाता है।

घरेलू विनिर्माताओं की शिकायत के बाद मंत्रालय की जांच इकाई व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने जांच की और इंडोनेशिया, मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम से आयातित फाइबरबोर्ड पर आयात शुल्क लगाने की सिफारिश की।

डीजीटीआर ने अधिसूचना में कहा कि प्राधिकरण ने सब्सिडी मार्जिन और घरेलू कंपनियों को हो रहे नुकसान के बराबर प्रतिपूर्ति शुल्क लगाने की सिफारिश की है। इस पहल का मकसद घरेलू उद्योग के हितों की रक्षा करना है।

प्राधिकरण ने अपनी सिफारिश में सीआईएफ (लागत, बीमा और माल ढुलाई) के 8.29 प्रतिशत से 27.52 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की सिफारिश की है।

डीजीटीआर ने अपनी जांच में पाया कि इन देशों से होने वाले सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को नुकसान हुआ है और निरपेक्ष रूप से आयात काफी बढ़ा है।

ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज लि./ग्रीनपैनल इंडस्ट्रीज लि., सेंचुरी प्लाईबोर्ड (इंडिया) लि. और रूशील डेकोर लि. ने सस्ते आयात पर शुल्क लगाने के लिये आवेदन दिये थे।

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