देश की खबरें | मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से शांतिपूर्ण क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध हटाने को कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को उन सभी जिला मुख्यालयों में प्रायोगिक आधार पर मोबाइल टावरों को चालू करने का निर्देश दिया है, जो जातीय संघर्ष से प्रभावित नहीं हैं।

इंफाल, सात नवंबर मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को उन सभी जिला मुख्यालयों में प्रायोगिक आधार पर मोबाइल टावरों को चालू करने का निर्देश दिया है, जो जातीय संघर्ष से प्रभावित नहीं हैं।

मणिपुर सरकार द्वारा राज्य में मोबाइल इंटरनेट प्रतिबंध को आठ नवंबर तक बढ़ाए जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति गोलमेई गाइफुलशिलु काबुई की पीठ ने यह फैसला सुनाया है।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, "मणिपुर सरकार को उन सभी जिला मुख्यालयों में मोबाइल टावर को चालू करने का दिया गया है, जो जातीय संघर्ष से प्रभावित नहीं हैं।’’

अदालत द्वारा छह नवंबर के आदेश में मणिपुर सरकार से यह भी कहा गया कि यदि कानून व्यवस्था की स्थिति ठीक हो, तो इसके बाद अन्य क्षेत्रों में भी सेवाएं बढ़ाई जाएं।

अदालत ने राज्य को मोबाइल इंटरनेट डेटा सेवाओँ के निलंबन या उन पर अंकुश लगाने के संबंध में जारी सभी आदेशों की प्रतियां अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने को भी कहा।

मामले की अगली सुनवाई नौ नवंबर को होगी।

मणिपुर में तीन मई से जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध (सितंबर में कुछ दिनों को छोड़कर) लगा हुआ है।

पिछले सप्ताह भीड़ द्वारा मणिपुर राइफल्स के एक शिविर पर हमला कर वहां से शस्त्र लूटे जाने के बाद इंटरनेट पर प्रतिबंध को बढ़ाने का आदेश दिया गया था। हमले के बाद सुरक्षाकर्मियों ने हवा में कई राउंड गोलियां चलाई थीं।

याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील योइहेनबा ध्रुव अरिबम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय द्वारा दिये गए निर्देशों को लागू करेगी।

वकील ने यह भी उम्मीद जताई कि 'ऑल नगा स्टूडेंट्स एसोसिएशन मणिपुर’ हिंसा से नहीं प्रभावित पहाड़ी जिलों में इंटरनेट प्रतिबंध को बढ़ाए जाने के विरोध में की गई आर्थिक नाकेबंदी को हटा देगा।

तीन नवंबर को की गई आर्थिक नाकेबंदी से पूर्वोत्तर राज्य में कई स्थानों पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

इंटरनेट पर प्रतिबंध को इस आशंका के बाद बढ़ाया गया था कि ताजा हिंसा के बाद असामाजिक तत्व तस्वीरों, नफरत भरे भाषणों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाकर जनता की भावना भड़का सकते हैं और इससे राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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