आईओए अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने 15 दोहरे कमरों की बुकिंग की स्वीकृति में विलंब पर सवाल उठाते हुए गुरुवार को खन्ना से ‘तथ्यात्मक स्थिति’ स्पष्ट करने को कहा था। बत्रा ने बताया कि इस देरी के कारण आईओए को लगभग 73 लाख रुपये का नुकसान हुआ। ये बुकिंग 18 रात के लिए थी।
आईओए के कोषाध्यक्ष आनंदेश्वर पांडे के माध्यम से भेजे गये पत्र के जवाब में खन्ना ने कहा कि एफसी ने इस मामले पर जून 2019 में एक बैठक की थी, लेकिन इसने बुकिंग को मंजूरी नहीं दी, क्योंकि ऐसा करने के लिए कोई प्रशासनिक मंजूरी नहीं थी।
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खन्ना ने अपने पत्र में लिखा, ‘‘ तोक्यो के होटल खर्चों के संबंध में मैंने इसकी पुष्टि की है कि एफसी को जून 2019 में भुगतान करने के लिए सूचना दी गयी थी। एफसी ने 15 जून को बताया कि किसी भी भुगतान से पहले फाइल पर अध्यक्ष और महासचिव की प्रशासनिक स्वीकृति की जरूरत होती है जो नहीं मिला था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ एफसी ने सही फैसला किया था। अब मैं वित्त विभाग से इस मामले के बारे में पूछ रहा हूं कि आईओए कार्यालय ने क्या कार्रवाई की। प्रशासनिक चूक कैसे और कहां हुई।’’
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तोक्यो ओलंपिक खेल इसी साल जुलाई-अगस्त में होने थी लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण इन्हें अगले साल के लिए स्थगित कर दिया गया।
खन्ना का यह बचाव बत्रा और महासचिव राजीव मेहता के बीच बढ़ती तकरार के दौरान आया है ।
इससे पहने बत्रा ने गुरुवार को खन्ना को लिखा था, ‘‘आपने वित्त समिति के अध्यक्ष के रूप में, अपनी समझ से जून 2019 में इसे स्वीकृति नहीं देने का फैसला किया और इसे लंबित रखा। अंतत: फरवरी 2020 में इसे स्वीकृति दी जब प्रति दोहरे कमरे का किराया 1080/1090 डॉलर था।’’
बत्रा ने कहा, ‘‘वित्तीय समिति के अध्यक्ष के रूप में आपकी या पूरी वित्त समिति की ओर से विलंब के कारण आईओए को अब 72,84,600 रुपये का नुकसान हुआ है। मैं उपरोक्त पर जल्द से जल्द तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने का अग्रह करता हूं।’’
खन्ना आईओए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी है। उन्होंने कहा, ‘‘आईओए एफसी के पास 1 रुपए खर्च करने की भी मंजूरी देने की कोई प्रशासनिक शक्ति नहीं है। हमने समिति के रूप में हमेशा इस सिद्धांत पर कायम रहे है।’’
उन्होंने कहा कि वह कोषाध्यक्ष को लिख रहे है बत्रा को नहीं, जिन्होंने खन्ना से जवाब मांगा है।
खन्ना ने पत्र में कहा, ‘‘मुझे कोषाध्यक्ष से संपर्क की उम्मीद है, न कि अध्यक्ष या महासचिव से।’’
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