जरुरी जानकारी | क्या कर से बचना नैतिक है? कुछ अरबपति दोस्तों की ओर से पूछा गया सवाल

नेब्रास्का (अमेरिका), 10 जून (द कन्वरसेशन) अमेरिका के कुछ सबसे धनी व्यक्ति अपनी संपत्ति में हर साल जोड़े गए अरबों डॉलर का एक छोटा सा हिस्सा ही संघीय आयकर के रूप में देते हैं, और कभी-कभी तो वे कुछ भी भुगतान नहीं करते।

खोजी पत्रकारिता संगठन प्रो पब्लिका का कहना है कि उसने आंतरिक राजस्व सेवा से इस बात की विस्तृत जानकारी हासिल की है, जो बताती है कि अमेरिकी अरबपति करों के भुगतान से बचने के लिए किस हद तक जाते हैं।

इसमें यह समझाने का दावा किया गया है कि जेफ बेजोस, एलन मस्क और माइकल ब्लूमबर्ग जैसे प्रमुख अरबपति ‘‘कर से बचने की रणनीतियों’’ का कैसे लाभ उठाते हैं, जो आम लोगों की पहुंच से दूर हैं।

हालांकि, आम जनता के बीच कर वंचना - जानबूझकर बकाया कर को न चुकाना, की अवैधता को लेकर समझ है, लेकिन कर से बचने की रणनीतियों का मूल्यांकन और जांच के तरीके में बहुत अधिक भिन्नता है, जिसके तहत किसी व्यक्ति द्वारा कानूनी कमियों के जरिए चुकाई जाने वाली राशि को कम से कम करने की कोशिश की जाती है।

प्रो पब्लिका की रिपोर्ट में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि अरबपतियों ने कुछ भी अवैध किया है। वर्ष 2016 के चुनाव से ठीक पहले किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग आधे अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप के साथ सहमत थे, कि कम से कम कर देना या बिल्कुल भी नहीं देना, ‘‘बुद्धिमानी’’ है। दो-तिहाई ने इसे ‘‘स्वार्थी’’ बताया और 61 प्रतिशत का कहना था कि ऐसा करना ‘‘देशप्रेम के खिलाफ है।’’

अधिकार और उत्तरदायित्व

व्यावसायिक नैतिकता का अध्ययन करने वाले एक विद्वान के रूप में मैं देख सकता हूं कि कैसे व्यक्ति कर से बचने के लिए नैतिक आधार की मदद लेते हैं और इसे तर्कसंगत बनाते हैं। नैतिक आधार एक तरह के सिद्धांत, मानदंड और मूल्य हैं, जो व्यक्ति या समूह के विश्वासों और व्यवहारों का मार्गदर्शन करते हैं। वे उस चीज को आकार दे सकता है, जिसे लोग महत्वपूर्ण मानते हैं- जैसे निष्पक्षता, अपनी या दूसरों की देखभाल, वफादारी और स्वतंत्रता, और सही तथा गलत या नैतिक तथा अनैतिक के बारे में निर्णय करना।

दार्शनिकों ने सदियों से इन नैतिक आधार पर बहस की है। ये मोटे तौर पर तीन अलग-अलग दृष्टिकोणों के साथ आते हैं, जिन पर कर से बचने की रणनीतियों के संदर्भ में विचार करना जरूरी है।

इमैनुएल कांट से लेकर जॉन रॉल्स तक, विचारकों ने सिद्धांतवादी (डीऑन्टोलॉजिकल) तर्क की बात कही है। यह नियमों, विनियमों, कानूनों

और मानदंडों के पालन पर आधारित नैतिकता पर जोर देता है। इस तरह के दृष्टिकोण से ‘‘क्या सही है’’ को इस तरह परिभाषित किया गया है कि जो समाज के प्रति किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी और कर्तव्य के अनुरूप है।

इस बीच जॉन स्टुअर्ट मिल और जेरेमी बेंथम जैसे उपयोगितावादी दार्शनिकों ने एक तर्क दिया जो ‘‘क्या सही है’’ की तलाश में लागत और लाभ को मान्यता देता है। इस विश्वास प्रणाली के तहत, जिसे परिणामवाद कहा जाता है, कोई काम नैतिक होगा, यदि उसका परिणाम बड़ी संख्या में लोगों के लिए फायदेमंद हो, भले ही उसकी कुछ कीमत क्यों न हो।

एक तीसरे दृष्टिकोण को गुण नैतिक आधार कहा जाता है, जो अरस्तू और अन्य यूनानी दार्शनिकों से जुड़ा हुआ है। इससे पता चलता है कि जो व्यक्ति के गुणों और नैतिक उत्कृष्टता की ओर प्रयासों को बढ़ाता है, और जो दोषों से बचने तथा अच्छा करने का प्रयास करने से परिभाषित होता है, वह सही है। इस तरह नैतिक व्यवहार वह है जो व्यक्ति को उसके अपने सबसे उत्कृष्ट नैतिक आत्मस्वरूप को पाने में सक्षम बनाता है।

नैतिकता और धन

जब इन्हें व्यक्तियों की कर से बचने की रणनीतियों पर लागू किया जाता है, तो प्रत्येक दृष्टिकोण इस बात की एक अनूठी समझ प्रदान करता है कि व्यक्ति ‘‘सही’’ होने के बारे में क्या सोचते हैं।

एक व्यक्ति जो सिद्धांतवादी नैतिक दृष्टिकोण को अपनाता है, वह कम जांच के साथ एक सार्वजनिक व्यक्ति की कर से बचने की रणनीतियों का मूल्यांकन करता है। जब तक कोई व्यक्ति कर संहिता का पालन करता है, और कानूनी रूप से काम करता है, तब तक कर से बचने की रणनीतियों को उस व्यक्ति द्वारा नैतिक माना जा सकता है।

इसके विपरीत एक परिणामवादी इस बात पर जोर देगा कि उन करों का उपयोग समाज को लाभ पहुंचाने के लिए कैसे किया जा सकता है। जब एक व्यक्ति, चाहे वह अरबपति हो या कोई अन्य व्यक्ति, करों से बचता है, तो वह दूसरों के लिए लागत को बढ़ाता है और समग्र रूप से समाज के लाभों को कम करता है।

एक व्यक्ति जो अरस्तू के सद्गुण वाले दृष्टिकोण को अपनाता है, वह किसी व्यक्ति के अन्य अच्छे व्यवहारों के संदर्भ में कर से बचने की रणनीतियों का मूल्यांकन कर सकता है। यदि कोई करों से बचता है लेकिन अन्य संस्थाओं को वित्तीय मदद देता है, और समाज के लिए लाभ भी पैदा करता है, तो इस व्यवहार को कम तिस्कार के साथ देखा जा सकता है।

इस तरह देखा जाए तो कर बचाने की रणनीति नैतिक है या नहीं, यह न केवल व्यक्ति के नैतिक आधार पर निर्भर करता है, बल्कि अत्यधिक धनी लोगों से समाज के लिए लाभ पैदा करने की अपेक्षा पर भी निर्भर करता है।

(द कन्वरसेशन)

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