विदेश की खबरें | इराक ने अमेरिकी सरकार से सैनिकों को वापस बुलाने पर बातचीत की
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

दोनों सरकारों ने इस मुद्दे पर 27 जनवरी को पहली बार मुलाकात की थी लेकिन अगले ही दिन जॉर्डन में ईरान समर्थित मिलिशिया (असैन्य लड़ाकों) के ड्रोन हमला करने के बाद यह वार्ता रुक गयी थी। इस हमले में अमेरिका के तीन सैनिक मारे गए थे।

इसके बाद अमेरिका ने इराक और सीरिया में कई हमले किए जिसमें पिछले सप्ताह एक हमले में शक्तिशाली कताइब हिज्बुल्ला मिलिशिया का एक शीर्ष कमांडर मारा गया था। अमेरिका कताइब हिज्बुल्ला को क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों पर ‘‘हमले में भाग’’ लेने का जिम्मेदार ठहराता है।

इराक सरकार ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए एक बयान में कहा कि इराक और अमेरिका दोनों पिछले साल अगस्त में आईएस से लड़ने में इराक की मदद करने में अमेरिकी सैनिकों की भूमिका में बदलाव पर बातचीत करने के लिए तैयार हो गए थे। इराक में करीब 2,500 अमेरिकी सैनिक हैं तथा उन्हें जमीनी स्तर पर सुरक्षा स्थिति और इराकी सशस्त्र सेना की क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए हटाया जाएगा।

इराक लंबे समय से अमेरिका और ईरान के साथ अपने संबंधों में संतुलन बिठाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

इराक सरकार ने कताइब हिज्बुल्ला के खिलाफ अमेरिका के हवाई हमलों की निंदा की है जो कि पॉपुलर मोबिजाइजेशन फोर्सेज (पीएमएफ) का हिस्सा है।

पीएमएफ मुख्य रूप से शिया मिलिशिया है जो एक शक्तिशाली राजनीतिक गुट बन गया है और उसके पास इराकी संसद में सबसे अधिक सीटें होने का अनुमान है।

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