जरुरी जानकारी | उद्योग मंडल 'एक देश एक चुनाव' के विचार के समर्थन में आए

नयी दिल्ली, 12 फरवरी भारतीय उद्योग जगत ने केंद्र और राज्यों के चुनाव एक साथ कराने की संकल्पना का खुलकर समर्थन करते हुए कहा है कि ‘एक देश एक चुनाव’ से कामकाज के संचालन की दक्षता बढ़ेगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

उद्योग मंडल फिक्की और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रतिनिधियों ने हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में ‘एक देश एक चुनाव’ पर गठित उच्चस्तरीय समिति से मुलाकात की और इस संकल्पना से जुड़े लाभ के बारे में अवगत कराया।

इस समिति का गठन राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव राष्ट्रीय चुनावों के साथ कराए जाने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए किया गया है।

फिक्की के अध्यक्ष अनीश शाह ने कहा कि देशभर में मौजूद 2.5 लाख से अधिक सदस्यों का मानना है कि विभिन्न स्तरों पर कई चुनाव होने से कारोबारी सुगमता प्रभावित होती है, सरकार में निर्णय लेने की गति धीमी पड़ जाती है और कर्मचारियों एवं नियोक्ताओं दोनों की लागत बढ़ जाती है।

उद्योग मंडल के महासचिव एस के पाठक ने केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के लिए हर पांच साल में एक चुनाव का प्रस्ताव रखा और चुनाव आचार संहिता की अवधि को भी छोटा रखने की मांग की ताकि सरकारी निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी न हो। उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं को इंडिया स्टैक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सार्वभौमिक मतदाता सूची बनाने की भी बात कही।

फिक्की के मुताबिक, भारत के दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर होने से यह महत्वपूर्ण है कि चुनावी प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। इससे लोगों को बेहतर परिणाम मिलेंगे और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी।

भारतीय उद्योग परिसंघ ने भी कोविंद समिति के साथ पहले अलग से हुए एक बैठक में इस मसले पर अपने विचार रखे।

सीआईआई ने कहा, ‘‘हमारा दृष्टिकोण चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के आर्थिक लाभों पर आधारित था, जिससे शासन की दक्षता बढ़ेगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।’’

उद्योग संगठन ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि बार-बार चुनाव होने से नीति निर्माण और प्रशासन में व्यवधान होता है जो सरकारी नीतियों के बारे में अनिश्चितता भी पैदा करता है।

सीआईआई ने कहा, ‘‘अधिकारियों को चुनाव कामकाज में लगाए जाने के कारण सरकारों के काम पर भी असर पड़ता है। चुनाव से पहले निजी क्षेत्र के निवेश निर्णय धीमे हो जाते हैं। इससे परियोजना कार्यान्वयन में देरी होती है क्योंकि आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है।’’

सीआईआई ने कहा कि एक साथ चुनाव होने पर परियोजना कार्यान्वयन में देरी पर प्रभावी रूप से कमी लाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा चुनाव संचालन पर लगने वाली लागत भी आधी हो जाएगी।

सीआईआई ने कहा, ‘‘एक साथ चुनाव कराने के दो विकल्प हैं। एक विकल्प पांच साल का एकल चक्र है और दूसरा विकल्प अंतरिम अवधि में लोकसभा चुनाव और राज्य चुनावों के बीच कम से कम 2.5 साल के अंतराल के साथ दो चरणों में एक साथ चुनाव कराने का है।’’

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