जरुरी जानकारी | भारतीय दल अमेरिका से लौटा, व्यापार वार्ता जारी रहेगी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. अमेरिका के साथ अंतरिम व्यपार समझौते पर एक और दौर की बातचीत पूरी करने के बाद मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय दल यहां लौट आया है। हालांकि, बातचीत जारी रहेगी क्योंकि कृषि और वाहन क्षेत्र में कुछ मुद्दों को अभी भी सुलझाया जाना बाकी है।

नयी दिल्ली, चार जुलाई अमेरिका के साथ अंतरिम व्यपार समझौते पर एक और दौर की बातचीत पूरी करने के बाद मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय दल यहां लौट आया है। हालांकि, बातचीत जारी रहेगी क्योंकि कृषि और वाहन क्षेत्र में कुछ मुद्दों को अभी भी सुलझाया जाना बाकी है।

एक अधिकारी ने बताया कि वार्ता अंतिम चरण में है और इसके निष्कर्ष की घोषणा नौ जुलाई से पहले होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, “भारतीय टीम वाशिंगटन से वापस आ गई है। बातचीत जारी रहेगी। कृषि और वाहन खंड में कुछ मुद्दों को सुलझाने की जरूरत है।”

अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए भारतीय दल 26 जून से दो जुलाई तक वाशिंगटन में था।

ये वार्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाबी शुल्क की निलंबन अवधि नौ जुलाई को समाप्त हो रही है। दोनों पक्ष उससे पहले वार्ता को अंतिम रूप देने पर विचार कर रहे हैं।

भारत ने अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों को शुल्क रियायत देने पर अपना रुख कड़ा कर लिया है क्योंकि ये राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं।

दो अप्रैल को अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत का अतिरिक्त जवाबी शुल्क लगाया, लेकिन इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया। हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत मूल शुल्क अभी भी लागू है। भारत अतिरिक्त 26 प्रतिशत शुल्क से पूरी छूट चाहता है।

भारत ने अब तक जिन मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें से किसी में भी व्यापारिक साझेदार के लिए डेयरी क्षेत्र को नहीं खोला है।

अमेरिका कुछ औद्योगिक वस्तुओं, वाहन, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों, वाइन, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और सेब, बादाम समेत अन्य सूखे मेवे, और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों जैसी कृषि वस्तुओं पर शुल्क रियायतें भी चाहता है।

भारत प्रस्तावित व्यापार समझौते में कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, चमड़े की वस्तुएं, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए शुल्क रियायत की मांग कर रहा है।

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