देश की खबरें | भारत और जापान शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग एवं आदान प्रदान बढ़ायेंगे

नयी दिल्ली, 7 अप्रैल केंद्रीय मंत्रिमंडल को बुधवार को भारत और जापान शैक्षणिक व अनुसंधान सहयोग और परस्पर आदान-प्रदान से जुड़े एक समझौता ज्ञापन की जानकारी दी गई, जिसके तहत दोनों देश वायुमंडलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों, समन्वयात्मक वैज्ञानिक प्रयोगों से संबंधित क्षेत्रों में सहयोग करेंगे ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह जानकारी दी गई।

सरकारी बयान के अनुसार, भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग की राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला (एनएआरएल) और जापान के क्योटो विश्वविद्यालय के रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल ह्यूमनोस्फेयर (आरआईएसएच) के बीच 4 नवंबर 2020 और 11 नवंबर 2020 को सबंधित संस्थानों के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग एवं परस्पर आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर हुए थे ।

इसके तहत तहत दोनों देश वायुमंडलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा समन्वयात्मक वैज्ञानिक प्रयोगों एवं अभियानों और प्रतिमान अध्ययनों से संबंधित क्षेत्रों में सहयोग करेंगे ।

दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक विशेष सामग्री, प्रकाशनों और सूचनाओं का आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान बैठकों एवं कार्यशालाओं, संकाय सदस्यों, छात्रों एवं अनुसंधानकर्ताओं के आदान प्रदान को जारी रखा जाएगा।

बयान के अनुसार, इस समझौते ज्ञापन पत्र के माध्यम से जापान के शिगराकी में मध्यम और ऊपरी वायुमंडलीय (एमयू) रडार, इंडोनेशिया के कोतोताबंग में भूमध्यवर्ती वायुमंडलीय रडार (ईएआर) और आरआईएसएच में उपलब्ध अनुपूरक उपकरणों के साथ-साथ एनएआरएल में मध्यमंडल-समतापमंडल-क्षोभमंडल (एमएसटी) रडार एवं उपलब्ध अनुपूरक उपकरणों जैसी सुविधाओं का परस्पर उपयोग किया जा सकेगा।

एनएआरएल और आरआईएसएच, वायुमंडलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के साथ-साथ वैज्ञानिकों के परस्पर आदान-प्रदान में सहयोग करते रहे हैं। यह व्यवस्था एक समझौता ज्ञापन पत्र के माध्यम से 2008 में बनायी गई थी। उपरोक्त समझौते ज्ञापन पत्र को 2013 में नवीनीकृत किया गया।

दोनों पक्षों ने नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप सहयोगात्मक अनुसंधान को प्रोत्साहन देने के लिए एक नवीन समझौते ज्ञापन पत्र पर नवंबर 2020 में हस्ताक्षर किए और इनका आदान-प्रदान किया।

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