जरुरी जानकारी | पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिये ‘ई-रिवर्स’ नीलामी समाप्त करने का ‘सैद्धांतिक’ फैसला
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नयी दिल्ली, 14 जुलाई नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि मंत्रालय ने उद्योग की मांग के मद्देनजर देश में पवन ऊर्जा परियोजनाओं में ई-रिवर्स नीलामी को बंद करने का सैद्धांतिक निर्णय किया है।
उन्होंने कहा कि इस बारे में जल्दी ही औपचारिक फैसला किया जाएगा।
पवन ऊर्जा चक्की (विंड टर्बाइन) बनाने वाली कंपनियां क्षेत्र के तेजी से विकास के लिये ‘ई-रिवर्स’ नीलामी समाप्त करने की मांग कर रही थीं।
‘रिवर्स’ नीलामी के तहत विक्रेता उस कीमत पर बोली लगाते हैं जिसपर वे अपनी वस्तुएं और सेवाएं बेचना चाहते हैं।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के ‘2030 में भारत: नवीकरणीय ऊर्जा में आत्मनिर्भर भारत के लिये रूपरेखा’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘मैं भरोसे के साथ कह सकता हूं कि पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिये ‘ई-रिवर्स’ नीलामी को समाप्त करने का सैद्धांतिक निर्णय किया गया है। इस बारे में जल्दी ही औपचारिक फैसला किया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि उद्योग पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिये बोली रूपरेखा में बदलाव की निरंतर मांग कर रहा था ताकि क्षेत्र में क्षमता विस्तार तेजी से हो सके।
सचिव ने कहा, ‘‘पवन ऊर्जा क्षेत्र में मुद्दे हैं। एक तरफ, हम पवन ऊर्जा की अच्छी मांग देखते हैं और दूसरी तरफ यह भी देखने को मिलता है कि परियोजना समय पर पूरी नहीं होती। इसीलिए मुझे लगता है कि इसपर गौर करने की जरूरत है तथा बोली प्रक्रिया समेत पूरी व्यवस्था पर फिर से विचार की जरूरत है। हमने यह काम पहले ही कर लिया है।’’
इससे पहले, भारतीय विंड टर्बाइन विनिर्माता संघ (आईडब्ल्यूटीएमए) के चेयरमैन तुलसी तांती ने कथित रूप से कहा था कि पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिये ‘रिवर्स’ नीलामी ने इसे अव्यावहारिक बना दिया है।
उन्होंने यह भी कहा था कि सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) द्वारा पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिये केंद्रीकृत बोली ने छोटे निवेशकों को बाजार से बाहर कर दिया है और पिछले कई साल के दौरान हरित ऊर्जा उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि हाइड्रोजन मिशन मंजूरी के उच्चस्तर पर है। ‘‘हमें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में इसे पेश किया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि अपतटीय पवन ऊर्जा के लिये निविदा अगले तीन-चार महीनों में जारी होनी चाहिए क्योंकि कई शुरुआती काम पूरे हो चुके हैं।
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