देश की खबरें | समान नाम वाली दवाओं के मुद्दे पर मानवाधिकार आयोग ने स्वास्थ्य मंत्रालय, डीजीसीआई को नोटिस जारी किया

नयी दिल्ली, 12 फरवरी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मीडिया में प्रकाशित एक आलेख पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारत के औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) को नोटिस भेजा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ ऐसी दवाएं हैं जिनके नाम समान या सुनने में एक जैसे लगते हैं लेकिन अलग-अलग बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें लिखा जाता है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

खबरों के अनुसार आयोग ने एक बयान में यह भी कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को सबसे पहले प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में 36 अलग-अलग औषधि नियंत्रकों से डेटा एकत्र करके सभी फार्मास्युटिकल ब्रांड नाम का ‘डेटाबेस बनाना’ होगा क्योंकि ‘देश में ऐसा कोई डेटाबेस नहीं है’।

आयोग ने कहा, ‘‘अधिकारी नुस्खे लिखने में त्रुटियों पर भी कोई आंकड़ा नहीं रखते।’’

आयोग ने कहा कि उसने भारत में अलग-अलग बीमारियों के उपचार में उपयोगी समान नाम वाली दवाइयां बड़ी मात्रा में बेचे जाने संबंधी एक समाचार-पत्र आलेख का स्वत: संज्ञान लिया है।

उसने कहा कि खबर के अनुसार फार्मेसी में इन दवाओं के बीच भ्रम के परिणाम मरीजों के लिए गंभीर हो सकते हैं क्योंकि ये दवाएं डॉक्टरों द्वारा विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए लिखी जा रही हैं।

आयोग ने कहा कि अगर आलेख की विषय-वस्तु सही है तो यह ‘मानवाधिकारों का गंभीर मुद्दा’ हो सकता है।

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