जरुरी जानकारी | मकान खरीदरों के मंच ने पश्चिम बंगाल के रियल्टी कानून पर न्यायालय के फैसले की सराहना की

नयी दिल्ली, चार मई मकान खरीदारों के मंच एफपीसीई ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार के रियल्टी क्षेत्र से जुड़े कानून को निरस्त किये जाने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। मंच ने कहा कि इस फैसले से ग्राहकों के हितों की रक्षा होगी तथा बिल्डरों के पक्ष में रेरा को हल्का बनाने के किसी भी कदम पर रोक लगेगी।

उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में रियल एस्टेट क्षेत्र के विनियमन संबंधी राज्य के कानून को मंगलवार को निरस्त कर दिया और कहा कि यह कानून ‘‘असंवैधानिक’’ है, क्योंकि यह केंद्र के रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) कानून (रेरा) का अतिक्रमण करता है।

न्यायालय ने घर खरीदने वालों के मंच ‘फोरम फॉर पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स’ की उस याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें पश्चिम बंगाल आवास उद्योग विनियमन कानून, 2017 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी।

इस बारे में संपर्क किये जाने पर एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि पश्चिम बंगाल आवास उद्योग विनियमन कानून (डब्ल्यूबीएचआईआरए) से हम सभी हैरान थे क्योंकि इससे पूरे देश में रियल एस्टेट क्षेत्र के लिये एक कानून का लक्ष्य प्रभावित हो रहा था।

डब्ल्यूबीएचआईआरए के कारण रेरा के कुछ प्रावधान हल्के हो गये थे और वे बिल्डरों के पक्ष में थे।

उपाध्याय ने कहा, ‘‘अगर इसे बने रहने की अनुमति दी जाती, तब हमें आशंका थी कि अन्य राज्य भी इसका अनुकरण करते।’’

उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय है। इससे न केवल रेरा और मकान खरीदारों के हितों की रक्षा हुई है बल्कि यह संदेश भी गया है कि रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) कानून प्रावधान को हल्का करने का कोई भी प्रयास अवैध होगा।

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पश्चिम बंगाल आवास उद्योग विनियमन कानून, 2017 घर क्रेताओं के लिए अहम सुरक्षा उपायों को शामिल करने में नाकाम रहा है।

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