देश की खबरें | उच्च न्यायालय का अदालत के दस्तावेज के साथ जालसाजी के आरोपी को राहत देने से इनकार

प्रयागराज, 15 मई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अदालत के दस्तावेज के साथ जालसाजी के आरोपी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने और उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अभियुक्त एक अदालत में कर्मचारी है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि अदालत के एक कर्मचारी द्वारा धोखाधड़ी करने का न्याय व्यवस्था पर दूरगामी हानिकारक प्रभाव पड़ता है और इससे न्यायपालिका में आम जनता का विश्वास कम होता है।

सोनभद्र जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वरिष्ठ सहायक के तौर पर काम करने वाले सुरेश कुमार मिश्रा की रिट याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने कहा, “जब अदालत का कर्मचारी निजी लाभ के लिए अपने अधिकार का दुरुपयोग करता है तो इससे न्यायिक निर्णय की निष्ठा प्रभावित होती है।”

सात मई को दिए अपने निर्णय में अदालत ने मिश्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (षड़यंत्र) समेत अन्य धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया।

पीठ ने कहा, “इस मामले में जांच अपरिपक्व चरण में है और अपराध करने में याचिकाकर्ता की भूमिका सरगना के तौर पर उभरकर सामने आई है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संज्ञेय अपराध का मामला बनता है और जांच जारी है।”

अदालत ने इस मामले में जांच जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश देते हुए यह याचिका खारिज कर दी।

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