देश की खबरें | पैंतीस प्राचार्यों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली सरकार को उच्च न्यायालय का नोटिस

नयी दिल्ली, 13 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा, जिसमें 35 सरकारी विद्यालयों में नवनियुक्त प्राचार्यों के चयन की जांच के निर्देश अधिकारियों को देने का अनुरोध किया गया है।

जनहित याचिका (पीआईएल) में यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ‘जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज’ जमा किए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के अलावा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और संबंधित प्राचार्यों से भी जवाब मांगा।

उच्च न्यायालय ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए आठ जुलाई की तारीख निर्धारित की है।

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली सरकार का शिक्षा विभाग इन प्राचार्यों द्वारा जमा किए गए आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने में बुरी तरह विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप उनका गलत चयन हुआ।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता नवेंदु चैरिटेबल ट्रस्ट के वकील ने दावा किया कि उसके पास कुछ अन्य प्राचार्यों के खिलाफ भी सबूत हैं।

अदालत ने पहले याचिकाकर्ता से कहा था कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उन्हें भी मामले में पक्षकार बनाया जाए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन 35 उम्मीदवारों में से कुछ ने आठ लाख रुपये से अधिक की वार्षिक पारिवारिक आय होने के बावजूद अपने चयन के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जबकि कुछ ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण का लाभ उठाया और फर्जी अनुभव दस्तावेज प्रस्तुत किया।

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