देश की खबरें | एचडीएफसी बैंक के सीईओ ने लीलावती ट्रस्ट की प्राथमिकी को न्यायालय में दी चुनौती, शुक्रवार को सुनवाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एचडीएफसी बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक शशिधर जगदीशन ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी की प्राथमिकी को चुनौती दी। यह प्राथमिकी मुंबई में प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल का संचालन करने वाले लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज की गई है।

नयी दिल्ली, तीन जुलाई एचडीएफसी बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक शशिधर जगदीशन ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी की प्राथमिकी को चुनौती दी। यह प्राथमिकी मुंबई में प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल का संचालन करने वाले लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज की गई है।

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष जगदीशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पेश हुए और उन्होंने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा कि मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

रोहतगी ने पीठ से कहा, ‘‘ यह एक अत्यावश्यक मामला है। मैं एचडीएफसी बैंक और उसके प्रबंध निदेशक की ओर से इसे कल के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध करता हूं। लीलावती अस्पताल के न्यासियों ने प्रबंध निदेशक और बैंक के खिलाफ एक तुच्छ प्राथमिकी दर्ज कराई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ बैंक को उनसे पैसा वसूलना है। उन्हें परेशान करने के लिए उन्होंने एमडी के खिलाफ मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्राथमिकी दर्ज कराई है।’’

रोहतगी ने कहा कि उन्होंने बम्बई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था लेकिन उच्च न्यायालय की तीन पीठों ने अब तक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए अगली संभावित तारीख 14 जुलाई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘हर दिन बैंक को नुकसान उठाना पड़ रहा है।’’

ट्रस्ट द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार जगदीशन ने न्यास के प्रशासन पर अवैध और अनुचित नियंत्रण बनाए रखने में चेतन मेहता समूह की मदद करने में वित्तीय सलाह देने के बदले कथित तौर पर 2.05 करोड़ रुपये की रिश्वत ली।

ट्रस्ट ने जगदीशन पर एक निजी बैंक के प्रमुख के रूप में अपने पद का दुरुपयोग कर एक धर्मार्थ संगठन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।

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