विदेश की खबरें | बदले परिदृश्य में समूह सात की शिखर बैठक शुक्रवार से ब्रिटेन में

समूह सात की पिछली बैठक दो साल पहले हुई थी और उसके बाद से दुनिया में व्यापक बदलाव आए है। कोरोना वायरस महामारी ने 37 लाख से अधिक लोगों की जान ले ली है और लॉकडाउन तथा कर्मचारियों की छंटनी से अर्थव्यवस्थाएं तबाह हो गयी हैं।

ऐसी स्थिति में ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान तथा कनाडा के नेताओं का स्वागत करेंगे, उनके एजेंडा में महामारी से उबरना सबसे ऊपर होगा।

जॉनसन ने कहा कि बैठक महामारी की शुरुआती प्रतिक्रिया को चिह्नित करने वाली प्रतिस्पर्धा और तकरार की दयनीय अवधि” से आगे बढ़ने में मदद करेगी। शिखर सम्मेलन की आधिकारिक शुरुआत से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को प्रकाशित एक आलेख में उन्होंने कहा, ‘‘यह दुनिया के सबसे महान और तकनीकी रूप से सर्वाधिक उन्नत लोकतंत्रों के लिए अपनी जिम्मेदारियां निभाने और दुनिया का टीकाकरण करने का अवसर है, क्योंकि कोई भी उस समय तक सुरक्षित नहीं हो सकता, तब तक कि सभी की सुरक्षा नहीं की जाती है।"

महामारी से पहले, जॉनसन ने इस शिखर सम्मेलन को जलवायु-केंद्रित बनाने की योजना बनाई थी। यह मुद्दा अब भी बैठक के एजेंडे में है। लेकिन बैठक में कोविड-19 मुद्दा हावी रहेगा तथा भौतिक और आर्थिक सुधार पर ध्यान केंद्रित करने और भविष्य की महामारियों के खिलाफ लचीलापन बनाने पर चर्चा होगी।

गरीब देशों को कोविड टीके देने की बाइडन की घोषणा के बाद जॉनसन ने कहा कि ब्रिटेन अपने अतिरिक्त भंडार से "लाखों" खुराकें दान करेगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ब्रिटेन ऐसा कब करेगा।

फ्रांस ने कहा कि राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों टीकों को लेकर सिफ घोषणाएं नहीं परिणाम देखना देखना चाहते हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि अक्टूबर में रोम में समूह-20 की बैठक से पहले "हमें एक विशिष्ट कैलेंडर की जरूरत है - दुनिया भर में और खासकर अफ्रीका में कितने लोगों का टीकाकरण होगा।’’ उन्होंने कहा कि दुनिया के कुल कोविड टीकों का दो प्रतिशत से भी कम हिस्सा अफ्रीका को मिला है।

महामारी के बिना भी, यह सदस्य देशों के लिए अहम मौका होगा। बाइडन और जापानी नेता योशिहिदे सुगा के लिए यह पहला शिखर सम्मेलन है। वहीं जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के लिए यह आखिरी शिखर सम्मेलन है। 16 साल तक सत्ता में रहने के बाद वह आने वाले महीनों में पद छोड़ देंगी। इस शिखर सम्मेलन को जॉनसन के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। उनके दो साल के कार्यकाल के दौरान ब्रेक्सिट और महामारी जैसे संकट सामने आए हैं।

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