जरुरी जानकारी | सरकार ने एयर कंडीशनर, एलईडी लाइट के लिये 6,238 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना को मंजूरी दी

नयी दिल्ली, सात अप्रैल सरकार ने बुधवार को एयर कंडीशनर और एलईडी लाइट के लिये 6,238 करोड़ रुपये के व्यय से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एसी और एलईडी के लिये पीएलआई योजना की मंजूरी से इन क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी।

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का मकसद संबंधित क्षेत्रों की अक्षमताओं को दूर कर, पैमाने की मितव्ययिता के साथ दक्षता सुनिश्चित करके देश में वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

पूर्ण रूप से अनुकूल परिवेश तैयार करने तथा भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बनाने के मकसद से योजना तैयार की गयी है। योजना से वैश्विक निवेश आकर्षित होने, बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होने और सतत रूप से निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘‘पीएलआई योजना के तहत एयर कंडीशनर तथा एलईडी लाइट के निर्माण से जुड़ी कंपनियों को अगले 5 वर्षों के दौरान भारत में निर्मित वस्तुओं की बढ़ी हुई बिक्री पर 4 प्रतिशत से 6 प्रतिशत की दर से प्रोत्साहन दिया जायेगा।’’

योजना के लिए कंपनियों का चयन उन कल-पुर्जों या उपकरण के हिस्से के विनिर्माण (सब असेम्बलिंग) को प्रोत्साहन देने के आधार पर किया जायेगा, जिन्हें फिलहाल भारत में पूरी क्षमता के साथ नहीं बनाया जा रहा है।

बयान के अनुसार तैयार वस्तुओं को सिर्फ जोड़ने (असेम्बल) के लिए प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा।

इसमें कहा गया है, ‘‘विभिन्न लक्षित क्षेत्रों के लिए पूर्व-पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाली कंपनियां योजना में भाग लेने के योग्य मानी जायेंगी। पुरानी परियोजना और नई परियोजना में निवेश करने वाली कंपनियां भी प्रोत्साहन योजना के योग्य मानी जायेंगी। प्रोत्साहन का दावा करने के लिए आधार वर्ष पर निर्मित वस्तुओं के सन्दर्भ में निवेश और बिक्री में वृद्धि की शर्त को पूरा करना होगा।

बयान के अनुसार उम्मीद है कि यह योजना, एसी और एलईडी लाइट उद्योग में उच्च विकास दर हासिल करने, भारत में सहायक कल-पुर्जों के सम्पूर्ण परिवेश को विकसित करने तथा भारत में विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर की कंपनियों को तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।

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