विदेश की खबरें | न्यू कैलेडोनिया क्षेत्र में आपातकाल लगाने पर विचार कर रहे फ्रांस के राष्ट्रपति
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

क्षेत्र के अधिकारियों और फ्रांसीसी मीडिया में आईं खबरों के अनुसार हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि एक पुलिसकर्मी समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

खबरों के अनुसार सोमवार से 130 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। न्यू कैलेडोनिया में मतदाता सूचियों के विस्तार के फ्रांस के प्रयासों के खिलाफ सोमवार को विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे।

राष्ट्रपति कार्यालय एलिस पैलेस में मैक्रों की अध्यक्षता में हुई बैठक में शामिल हुए प्रधानमंत्री गैब्रियल एटल ने संसद में अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल लगाने का उद्देश्य "कम से कम समय में व्यवस्था बहाल करना" होगा।

आपातकाल लागू करने के तरीकों को लेकर एक आदेश बुधवार दोपहर फ्रांसीसी मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जाएगा।

मैक्रों ने एक बयान में राजनीतिक वार्ता बहाल करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विदेशी मंत्री से न्यू कैलेडोनिया के प्रतिनिधिमंडलों को पेरिस में आमंत्रित का निर्देश दिया।

बयान में कहा गया है, " हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती और व्यवस्था बहाल करने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।”

न्यू कैलेडोनिया द्वीप समूह में स्वतंत्रता चाहने वाले मूल निवासी कनकों और फ्रांस का हिस्सा बने रहने के इच्छुक लोगों के बीच दशकों से तनाव रहा है।

फ्रांस के गृह मंत्रालय ने लंबे समय तक जेल के रूप में इस्तेमाल किए गए न्यू कैलेडोनिया में मंगलवार को पुलिस भेजी थी।

राजधानी नोमिया और इसके आसपास कर्फ्यू लागू होने व सभा पर प्रतिबंध के बावजूद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं।

उच्चायुक्त के पद पर आसीन क्षेत्र के शीर्ष फ्रांसीसी अधिकारी लुई ली फ्रैंक ने आगाह किया है कि अगर शांति कायम नहीं हुई तो नोमिया महानगर क्षेत्र में “कई मौत” हो सकती हैं, जहां मंगलवार को मतदान अधिकारों को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे।

फ्रैंक ने कहा, “स्थिति गंभीर नहीं, बल्कि बहुत गंभीर है। हम खतरनाक, घातक स्थिति में पहुंच गए हैं। ” मतदाता सूचियों के विस्तार से फ्रांस समर्थक राजनेताओं को फायदा जबकि कनक समुदाय के मूल निवासियों को नुकसान होगा।

बुधवार को फ्रांस की नेशनल असेंबली ने न्यू कैलेडोनिया में चुनाव निकाय में सुधार से संबंधित संविधान संशोधन को मंजूरी दे दी थी। संशोधन विधेयक के पक्ष में 351 जबकि विरोध में 153 सांसदों ने वोट डाला।

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