विदेश की खबरें | प्रतिरोध का सामना कर रही म्यांमा की सैन्य सरकार ने अनिवार्य सैन्य सेवा कानून लागू किया
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

शनिवार को लागू किया गया यह कानून तत्काल प्रभाव से लागू हो गया और इस बारे में घोषणा सरकारी टेलीविजन पर की गई। यह कदम इस बात की स्वीकारोक्ति है कि सेना अपने शासन के खिलाफ देशभर में सशस्त्र प्रतिरोध का सामना कर रही है।

सैन्य सरकार के प्रवक्ता मेजर जनरल मिन तुन ने एक बयान में कहा कि म्यांमा के मौजूदा हालात के चलते यह कानून लागू किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह कहना चाहते हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल सैनिक की नहीं है। यह देश के सभी हिस्सों के सभी लोगों की जिम्मेदारी है। इसलिए, मैं सभी से कहना चाहूंगा कि पीपुल्स मिलिट्री सर्विस कानून के तहत गर्व के साथ राष्ट्र की सेवा करें।’’

पूर्ववर्ती सैन्य सरकार के तहत 2010 में पारित ‘पीपुल्स मिलिट्री सर्विस लॉ’ के तहत, 18 से 45 वर्ष की आयु के पुरुषों और 18 से 35 वर्ष की महिलाओं को दो साल के लिए सशस्त्र बलों में शामिल किया जा सकता है, जिसे राष्ट्रीय आपात काल के दौरान पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है।

बड़े पैमाने पर भर्ती किये जाने के तहत, पुरुषों के लिए ऊपरी उम्र सीमा 35 वर्ष और महिलाओं के लिए 27 साल है। चिकित्सक और इंजीनियर सहित कुछ पेशेवर श्रेणियों में पुरुषों एवं महिलाओं, दोनों पर ऊपरी उम्र सीमा लागू होगी। उनका सेवा काल तीन साल का होगा।

मौजूदा सत्तारूढ़ सैन्य परिषद को ‘शासकीय प्रशासनिक परिषद’ भी कहा जाता है। यह लोकतंत्र समर्थक आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार को अपदस्थ कर 2021 में सत्ता में काबिज हुई थी।

सत्ता पर सेना के कब्जा करने के बाद, देशव्यापी संघर्ष शुरू होने से सैन्य शासन को एक बड़ा झटका लगा जिसके मद्देनजर यह कानून लागू किया गया है।

पिछले साल अक्टूबर में सशस्त्र जातीय संगठन के गठबंधन द्वारा तीन महीने से भी कम समय में शुरू किये गए एक हमले के बाद चीन की सीमा पर पूर्वोत्तर म्यांमा में एक बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया गया।

इस घटनाक्रम ने देश के अन्य हिस्सों में सैन्य शासन का विरोध कर रहे लड़ाकों को अपने हमले शुरू करने के लिए प्रेरित किया। हाल के सप्ताहों में, पश्चिमी राज्य रखीन में लड़ाई के कारण सैकड़ों सरकारी सुरक्षा कर्मियों को पड़ोसी देश बांग्लादेश भागना पड़ा था।

सेना को दो दुश्मनों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें लोकतंत्र समर्थक ताकतें, और बेहतर प्रशिक्षित एवं हथियारों से लैस जातीय अल्पसंख्यक सशस्त्र समूह हैं जो दशकों से व्यापक स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रतिरोध कर रहे समूहों के बीच गठजोड़ है।

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