देश की खबरें | तमिलनाडु के मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति पर मौजूदा स्थिति बरकरार रहेगी : न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अपने 25 सितंबर के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने तमिलनाडु सरकार से राज्य में ‘अगमिक’ परंपरा द्वारा शासित मंदिरों में 'अर्चकों' या पुजारियों की नियुक्ति पर मौजूदा शर्तों को बनाए रखने के लिए कहा था।

नयी दिल्ली, आठ नवंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अपने 25 सितंबर के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने तमिलनाडु सरकार से राज्य में ‘अगमिक’ परंपरा द्वारा शासित मंदिरों में 'अर्चकों' या पुजारियों की नियुक्ति पर मौजूदा शर्तों को बनाए रखने के लिए कहा था।

न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की पीठ प्रथम दृष्टया तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे की इस दलील से सहमत नहीं हुई कि राज्य ‘अर्चकों’ को नियुक्त करने का हकदार है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “ ‘अर्चकों’ की नियुक्ति एक धर्मनिरपेक्ष कार्य है और राज्य उन्हें नियुक्त करने का हकदार है।”

पीठ ने कहा, तर्क यह है कि राज्य सरकार एक विशेष संप्रदाय के मंदिरों में ‘अर्चकों’ की नियुक्ति में ‘अगम’ परंपराओं के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं कर रही है।

‘अगम’ हिंदू शास्त्रों के तांत्रिक साहित्य का संग्रह है और ऐसे ग्रंथों की तीन शाखाएं हैं - ‘शैव, वैष्णव और शाक्त’।

शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि तमिलनाडु प्रशासन द्वारा संचालित स्कूलों में ‘अर्चकों’ के लिए एक साल का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम करने के बाद अन्य संप्रदायों के लोगों को ‘अर्चक’ बनने की अनुमति देकर राज्य सरकार ‘अगम मंदिरों’ में ‘अर्चकों’ की नियुक्ति की वंशानुगत योजना में हस्तक्षेप कर रही है।

पीठ ने 25 सितंबर को ‘अर्चकों’ की नियुक्ति के संबंध में यथास्थिति (मौजूदा शर्तों) का आदेश दिया, जिससे राज्य सरकार के अनुसार राज्य भर के मंदिरों में 2405 'अर्चकों' की नियुक्ति रुक जाएगी।

शीर्ष अदालत ने अब याचिकाओं पर आगे की सुनवाई 25 जनवरी, 2024 को तय की है और कहा है कि वह इसी तरह के मुद्दे पर मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित कार्यवाही पर रोक नहीं लगाएगी।

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