देश की खबरें | समाज के बेजुबान तबकों को राहत प्रदान करने के लिए दिल्ली सरकार योजना बनाए: अदालत

नयी दिल्ली, तीन मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को असंगठित क्षेत्र की विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों समेत समाज के ‘बेजुबान एवं हाशिये पर रहने वाले’ तबकों को उपयुक्त एवं पर्याप्त राहत प्रदान करने के लिए एक योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति आशा मेनन की पीठ की राय थी कि ‘‘महामारी की भयावहता के मद्देनजर प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि समाज के उस तबके को उपयुक्त और पर्याप्त राहत दी जा सके जो अपनी आवाज नहीं उठा सकते और जो हाशिये पर हैं। ’’

पीठ ने वकील अभिजीत पांडे की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने दिल्ली में सभी प्रवासी श्रमिकों का असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के तहत पंजीकरण करने एवं उन्हें मुफ्त दवाइयां एवं चिकित्सा सुविधाएं देने का अनुरोध किया है।

याचिका में केंद्र एवं दिल्ली सरकार को यह भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे राष्ट्रीय राजधानी में सभी प्रवासी श्रमिकों को अंतर-राज्यीय प्रवासी अधिनियम की आय अंतरण योजना के तहत पैसे का भुगतान करें।

अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से इस याचिका पर जवाब मांगा है।

पीठ ने यह भी आदेश दिया कि इस अर्जी को मुख्य सचिव के लिए प्रतिवेदन के रूप में लिया जाए ‘‘जिन्हें ‘घर से काम करने वाले श्रमिकों’, ‘स्वरोजगार श्रमिकों’ और असंगठित श्रमिकों की खातिर दो सप्ताह के अंदर संगठित कदम वाली योजना बनाने का निर्देश दिया जाता है।

मामले की अगली सुनवाई 20 मई को होगी।

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