देश की खबरें | न्यायालय के फैसले के खिलाफ टिप्पणी के लिए माकपा और कांग्रेस ने केरल के राज्यपाल की आलोचना की

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कोझिकोड/नयी दिल्ली, 12 अप्रैल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस ने विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों के वास्ते समय सीमा निर्धारित करने संबंधी उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले पर केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की टिप्पणी की शनिवार को आलोचना की।

आर्लेकर ने कथित तौर पर कहा है कि न्यायालय द्वारा समय सीमा निर्धारित करना न्यायपालिका द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करना है।

केरल के राज्यपाल ने यह टिप्पणी एक राष्ट्रीय दैनिक को दिए साक्षात्कार में की, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि इस मुद्दे को खंडपीठ द्वारा संविधान पीठ को भेजा जाना चाहिए था।

उनके इस रुख की व्यापक आलोचना हुई है। माकपा महासचिव एम ए बेबी ने इसे ‘‘अवांछनीय’’ करार दिया है, जबकि कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि आर्लेकर की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है।

कोझिकोड में पार्टी के एक कार्यक्रम में वेणुगोपाल ने कहा कि राज्यपाल ने शीर्ष अदालत के फैसले की आलोचना की क्योंकि उन्हें डर था कि भाजपा का एजेंडा उजागर हो जाएगा।

अलप्पुझा से कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केरल के राज्यपाल उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ आगे आए हैं।’’

वहीं, दिल्ली में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बेबी ने कहा कि न्यायालय का फैसला सभी पर लागू होता है, जिसमें भारत के राष्ट्रपति भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भी संसद द्वारा पारित विधेयकों पर देरी नहीं करते या उन्हें रोक कर नहीं रखते। उन्होंने कहा, ‘‘तो राज्यपालों के पास वह अधिकार कैसे हो सकता है जो राष्ट्रपति के पास नहीं है?’’

माकपा महासचिव ने कहा कि आर्लेकर को न्यायालय के फैसले का स्वागत करना चाहिए था।

बेबी ने कहा, ‘‘सभी राज्यपालों को उच्चतम न्यायालय के फैसले की भावना को समझना और स्वीकार करना चाहिए। हालांकि, केरल के राज्यपाल की टिप्पणी से पता चलता है कि वह शीर्ष अदालत के फैसले की भावना को स्वीकार नहीं करते हैं। न्यायालय के फैसले की उनकी आलोचना अवांछनीय है।’’

वेणुगोपाल ने कार्यक्रम में आरोप लगाया कि आर्लेकर, जो संसद के कानून बनाने के अधिकार का ‘‘महिमामंडन’’ करते हैं, विधानसभा के अधिकार के प्रति ‘‘कोई सम्मान’’ नहीं रखते हैं।

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनता द्वारा चुनी गई (राज्य) सरकारों को पर्दे के पीछे से नियंत्रित करने के लिए राज्यपालों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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