न्यायालय ने भावनाएं आहत करने के मामले में वकील प्रशांत भूषण को कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया

प्रशांत भूषण के खिलाफ पूर्व सैनिक जयदेव रजनीकांत जोशी ने राजकोट के भक्तिनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से देश में लागू लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ धारावाहिक के फिर से प्रसारण के खिलाफ ट्वीट करके अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

जमात

नयी दिल्ली, एक मई उच्चतम न्यायालय ने हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को कथित रूप से ठेस पहुंचाने के आरोप में अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ गुजरात के राजकोट में दर्ज मामले में उन्हें दंडात्मक कार्रवाई से शुक्रवार को संरक्षण प्रदान कर दिया।

प्रशांत भूषण के खिलाफ पूर्व सैनिक जयदेव रजनीकांत जोशी ने राजकोट के भक्तिनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से देश में लागू लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ धारावाहिक के फिर से प्रसारण के खिलाफ ट्वीट करके अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

शीर्ष अदालत ने प्रशांत भूषण को अंतरिम राहत और संरक्षण प्रदान करते हुये कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति टीवी पर कुछ भी देख सकता है।’’ साथ ही पीठ ने सवाल किया कि कोई किसी कार्यक्रम विशेष को नहीं देखने के लिये लोगों से कैसे कह सकता है ?

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से भूषण की याचिका पर सुनवाई की और गुजरात पुलिस को नोटिस जारी किया। पीठ ने इस मामले को दो सप्ताह बाद आगे सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाये। इस बीच, 12 अप्रैल को दर्ज प्राथमिकी में नामजद याचिकाकर्ता (प्रशांत भूषण) के खिलाफ कोई दंडत्मक कार्रवाई नहीं होगी।’’

भूषण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने यह प्राथमिकी निरस्त करने का अनुरोध करते हुये पीठ से कहा कि फिलहाल उन्हें किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया जाये।

जोशी ने अपनी शिकायत में भूषण पर आरोप लगाया कि उन्होंने 28 मार्च को एक ट्वीट में धारावाहिक ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के लिये ‘अफीम’ शब्द का इस्तेमाल करके तमाम हिन्दुओं की भावनाओं को आहत किया है।

यह प्राथमिकी आपराधिक साजिश करने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण कृत्य करने और जनता के बीच भय पैदा करने जैसे अपराध से संबंधित दंडात्मक प्रावधानों के तहत दर्ज की गयी है।

भूषण ने अपने ट्वीट में कथित तौर पर कहा था ‘‘ जबरन लॉकडाउन की वजह से करोड़ों भूखे लोग घरों के लिए सैकड़ों मील चल रहे हैं, वहीं हमारे हृदयहीन मंत्री जनता को ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ की अफीम खिलाकर जश्न मना रहे हैं।’’

दवे ने कहा कि वह इस मुद्दे पर नहीं जा रह हैं कि लोगों को क्या देखना चाहिए और क्या नहीं, बल्कि वह तो सिर्फ प्राथमिकी दर्ज किये जाने के खिलाफ ही बहस कर रहे हैं।

इस बीच, रजिस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि प्रशांत भूषण ने बृहस्पतिवार को यह यचिका दायर की थी और यह सुनवाई के लिये शुक्रवार को सूचीबद्ध हुयी।

अनूप

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