देश की खबरें | न्यायालय ने उप्र की मतदाता सूची में ‘दोहरी’ प्रविष्टियों से जुड़ी जनहित याचिका का निस्तारण किया

नयी दिल्ली, 12 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग (ईसी) की दलीलों पर ध्यान दिया और उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में कथित ‘दोहरी’ मतदाता प्रविष्टियों से संबंधित एक जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।

शीर्ष अदालत ने पांच फरवरी को जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता एनजीओ ‘संविधान बचाओ ट्रस्ट’ द्वारा उठाए गए दो मुद्दों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा था, जिसमें दावा किया गया था कि मतदाता सूची त्रुटिपूर्ण थी।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी ने दोहरी प्रविष्टियों के संबंध में जिला चुनाव अधिकारियों को विशिष्ट संदेश जारी नहीं किया था।

एनजीओ ने दावा किया कि विभिन्न चुनाव क्षेत्रों की मतदाता सूची में लोगों की समान प्रविष्टियों के कारण मतदाता सूची त्रुटिपूर्ण हो गई है।

चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील अमित शर्मा ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने जवाब में याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए दोनों सवालों का जवाब दिया है और सभी जिला चुनाव अधिकारियों के साथ मुख्य चुनाव अधिकारी के संदेश का हवाला दिया है।

वकील ने कहा, ‘‘उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी मतदाता को (मतदाता सूची से)बाहर नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, मतदाता सूची से जुड़े अधिकारियों के आदेशों के खिलाफ अपील का भी प्रावधान है।’’

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि चुनाव पैनल द्वारा एक व्यापक हलफनामा दायर किया गया है जिसमें उन मतदाताओं के नाम दर्ज करने के चरणों की व्याख्या की गई है जो हटाए गए हैं या जनसांख्यिकीय रूप से स्थानांतरित हो गए हैं।

पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘हम चुनाव आयोग के जवाब से संतुष्ट हैं और याचिका का निस्तारण् करते हैं।’’

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