देश की खबरें | अदालत ने दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी की हत्या के दो आरोपियों को नहीं दी जमानत

नयी दिल्ली, चार मई राष्ट्रीय राजधानी के उत्तरी-पूर्वी हिस्से में पिछले साल फरवरी में हुए दंगों में आईबी के एक अधिकारी की हत्या करने के दो आरोपियों को जमानत देने से इंकार करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि वे ‘‘अभियोजन पक्ष के साथ लुका-छुपी खेल रहे हैं।’’

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा कि आईबी के एक युवा अधिकारी की मौत से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर अदालत दो आरोपियों के प्रति नरम रुख रखने के पक्ष में नहीं है।

अदालत ने कहा कि इस मामले में मुकदमे की सुनवाई चल रही है और आरोपी के पास इस दौरान सही समय पर जमानत के लिए अनुरोध करने का मौका है।

पिछले साल अक्टूबर और इस साल फरवरी में निचली अदालत द्वारा जमानत से इंकार किए जाने के बाद समीर खान और कासिम ने उच्च न्यायालय में अर्जी दी थी, जिसपर पीठ ने यह टिप्पणी की।

अदालत के समक्ष दोनों ने दावा किया कि उन्हें मामले में फंसाया गया है और आईबी अधिकारी की हत्या से उनका संबंध जोड़ने के लिये कोई साक्ष्य रिकॉर्ड में नहीं है।

अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों की जमानत का पूरजोर विरोध करते हुए कहा कि वे लोग ना सिर्फ उस भीड़ का हिस्सा थे, जिसने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया बल्कि उस समूह का भी हिस्सा थे जिसने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, फेंफड़े और मस्तिष्क में चोट के कारण शॉक और हेमरेज से आईबी अधिकारी की मौत हुई है।

अदालत ने यह भी कहा कि पोस्टमॉर्टम से यह भी स्पष्ट है कि शर्मा के शरीर पर 52 चोट थे जो तेजधार हथियार और भारी सामान काटने वाले हथियार के अलावा पिटाई के कारण लगे थे, और वे सभी उनके मरने के ठीक पहले लगे चोट के निशान थे।

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