जरुरी जानकारी | केंद्रीय यूनियनों ने निजीकरण के खिलाफ कोयला श्रमिकों के आंदोलन का समर्थन किया

नयी दिल्ली, चार जुलाई केंद्रीय मजदूर संगठनों (सीटीयू) ने शनिवार को कोयला क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ कोयला मजदूरों के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का समर्थन किया ।

एक संयुक्त बयान में, 10 केंद्रीय यूनियनों - इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एक्टू, एलपीएफ और यूटीयूसी - ने मांग की कि सरकार को चाहिए कि वह कोयले की वाणिज्यिक खनन की अपनी नीति पर रोक लगाये और इसे वापस ले।

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बयान में कोयला कामगारों की 2-4 जुलाई तक चली हड़ताल को सफल बताया गया है।

बयान में कहा गया है, ‘‘यह हड़ताल एक शानदार सफलता थी।’’इन यनियनों ने कहा कि इस हड़ताल के असर की वजह से 90 लाख टन कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ और कोयला पहुंचाने का काम रुक गया।

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इस हड़ताल का आह्वान, निजी क्षेत्र द्वारा कोयले के वाणिज्यिक खनन के माध्यम से कोयला क्षेत्र का पूरी तरह से निजीकरण करने के सरकार के फैसले के विरोध करने के लिए किया गया था।

श्रमिक संगठनों ने कहा, ‘‘सरकार निजीकरण तथा सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री के साथ आगे बढ़ने के अपने अहंकारी रवैये पर अड़ी है, तथा रक्षा उत्पादन क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण संवेदनशील क्षेत्र में खतरनाक रूप से विदेशी कंपनियों के प्रवेश के नियम को उदार बना रही है जहां उनकी भागीदारी को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने का प्रयास है तथा 41 आयुध कारखानों के निगमीकरण का प्रयास है। भारतीय रेलवे के निजीकरण की अपनी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रही है। लाभ देने वाले मार्ग पर चलने वाली 151 ट्रेन सेवाओं के निजीकरणकरण का फैसला हो चुका है।

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