देश की खबरें | संभावित अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से आंखें नहीं मूंद सकते : दिल्ली उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने जोर देकर कहा कि वह संभावित अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से आंखें नहीं मूंद सकता। उच्च न्यायालय ने इसी के साथ दिल्ली सरकार के अधिकारियों को नियमित तौर पर आजाद मार्केट का निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों का पता लगा कर मामले को अग्नि रोधक इकाई के संज्ञान में लाने का निर्देश दिया।

नयी दिल्ली, सात नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने जोर देकर कहा कि वह संभावित अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से आंखें नहीं मूंद सकता। उच्च न्यायालय ने इसी के साथ दिल्ली सरकार के अधिकारियों को नियमित तौर पर आजाद मार्केट का निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों का पता लगा कर मामले को अग्नि रोधक इकाई के संज्ञान में लाने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को सुनाए गए आदेश में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) को ईमानदारी और कड़ाई से अग्नि सुरक्षा नियमों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा।

अदालत ने यह आदेश आजाद मार्केट रेसीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनाया। जनहित याचिका में उत्तरी दिल्ली के बाजार में अनधिकृत एवं अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इलाके में इमारतों का निर्माण उप कानूनों और अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर किया गया, जिससे आग लगने की घटनाएं या मानव जीवन की क्षति होती है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत पर एमसीडी ने पर्याप्त कार्रवाई की और इलाके से अनधिकृत और अवैध निर्माण को हटा दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, यह अदालत संभावित अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर आंखें नहीं मूंद सकती और इसलिए एससीडी और दिल्ली अग्निशमन सेवा को निर्देश दिया जाता है कि दिल्ली अग्निशमन नियम 27 में परिसर के लिए उल्लेखित अग्नि सुरक्षा नियमों को ईमानदारी से और कड़ाई से लागू करे।’’

इस पीठ में न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला भी शामिल थे।

अदालत ने कहा कि अनधिकृत और अवैध निर्माण के छिटपुट मामलों में, याचिकाकर्ता केंद्र के विशेष कार्य बल से संपर्क कर सकता है, जिसे कानून के तहत अवैध निर्माण, सार्वजनिक भूमि/सड़कों, फुटपाथ आदि पर अतिक्रमण की शिकायतों पर संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने का अधिकार है।

पीठ ने फैसले में कहा, ‘‘मौजूदा याचिका का निस्तारण याचिकाकर्ता को यह आजादी देने के साथ किया जाता है कि वह जरूरत पड़ने पर एसटीएफ से संपर्क कर सकता है।’’

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