जरुरी जानकारी | बीएसएनएल, एमटीएनएएल ने 10,000 करोड़ रुपये एजीआर बकाये का अबतक नहीं किये भुगतान

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल ने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) मद में 10,000 करोड़ रुपये बकाये का भुगतान अबतक नहीं किये हैं। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

दूरसंचार विभाग के आकलन के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 तक बीएसएनएल के ऊपर एजीआर बकाया 5,835 करोड़ रुपये और एमटीएनएल के मामले में यह करीब 4,352 करोड़ रुपये था। इसमें ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज शामिल है।

आधिकारिक सूत्र के अनुसार बीएसएनएल और एमटीएनएल ने एजीआर बकाया मद में कोई राशि भुगतान नहीं किये हैं।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल दूरसंचार परिचालकों को निर्देश दिया था कि उन्हें 31 मार्च, 2021 तक दूरसंचार विभाग की मांग के अनुसार कुल बकाया में से 10 प्रतिशत का भुगतातन 31 मार्च, 2021 तक करना होगा।

बीबएसएनएल और एमटीएनएल उच्चतम न्यायालय में एजीआर मामले में पक्ष नहीं थे। लेकिन दूरसंचार विभाग के एजीआर बकाया मामले में कंपनियों की सूची में सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों के नाम थे।

सरकार के आकलन के अनुसार भारती एयरटेल पर कुल एजीआर देनदारी 43,980 करोड़ रुपये, वोडाफोन आइडिया पर 58,254 करोड़ रुपये, टाटा समूह पर 16,798 करोड़ रुपये, क्वाड्रेंट टेलीवेंचर्स पर 189.22 करोड़ रुपये, रिलायंस जियो पर 195 करोड़ रुपये, एयरसेल पर 12,389 करोड़ रुपये, रिलायंस कम्युनिकेशंस (सिस्तेमा श्याम समेत) पर 25,194 करोड़ रुपये और वीडियोकॉन टेलीकॉम पर 1,376 करोड़ रुपये बकाये थे।

भारत में अपना कारोबार बंद करने वाली लूप टेलीकॉम, एतिसालात डीबी और एस टेल पर संयुक्त रूप से 604 करोड़ रुपये बकाये थे।

आधिकारिक आंकड़े के अनुसार भारती एयरटेल ने कुल मांग में से 18,004 करोड़ रुपये, वोडाफोन आइंडिया ने 7,854.37 करोड़ रुपये, टाटा ग्रुप ने 4,197.37 करोड़ रुपये, क्वाड्रेंट टेलीवेंचर्स ने 19.73 करोड़ रुपये, रिलायंस जियो 195.18 करोड़ रुपये, ह्यूजेस कम्युनिकेशंस ने 62.9 करोड़ रुपये, आर कॉम ने 4.69 करोड़ रुपये तथा एतिसालात डीबी ने 8.4 करोड़ रुपये (परिसमापक के जरिये) दिये हैं।

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