देश की खबरें | उच्च न्यायालय को नैनीताल से स्थानांतरित करने के खिलाफ बार एसोसिएशन ने शीर्ष अदालत का रुख किया

नैनीताल, 16 मई उत्तराखंड उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय के नैनीताल से बाहर प्रस्तावित स्थानांतरण के विरूद्ध उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है।

उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन इस अदालत को नैनीताल से बाहर स्थानांतरित करने के कदम का विरोध कर रहा है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आठ मई को राज्य सरकार से उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किए जाने के लिए सबसे उपयुक्त जगह चिन्हित करने को कहा था ।

बार एसोसिएशन में इस निर्णय के खिलाफ विरोध फूट पड़ा और तुरंत ही उसने उच्च न्यायालय को नैनीताल के बाहर स्थानांतरित किए जाने के विरूद्ध एक बैठक बुलायी।

बार को इस बात का भरोसा दिलाया गया था कि इस आदेश पर दस्तखत नहीं किए गए हैं लेकिन बाद में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से अदालत को कहीं और स्थानांतरित किए जाने के लिए उपयुक्त जगह ढूंढने को कहा ।

उच्च न्यायालय ने एक पोर्टल भी बनाया है जिससे इस मुद्दे पर लोग ऑनलाइन अपनी राय दे सकें । इस राय से लोगों का मत स्पष्ट हो जाएगा कि उच्च न्यायालय को नैनीताल से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए या नहीं ।

हालांकि, देहरादून बार एसोसिएशन उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किए जाने के पक्ष में है और उसने विशेष अनुमति याचिका में उसे भी पक्ष बनाए जाने के लिए उच्चतम न्यायालय से प्रार्थना करने का निर्णय लिया है ।

देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने कहा कि सभी वकील इस मत पर सहमत हैं कि प्रदेश के लोगों के व्यापक हित में और याचिकाकर्ताओं की सुविधा को देखते हुए उच्च न्यायालय को नैनीताल से बाहर स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए ।

उच्च न्यायालय ने कहा है कि नए स्थान में इतनी जगह होनी चाहिए कि अदालत कक्षों, सम्मेलन कक्ष, कम से कम 7000 वकीलों के लिए चैंबर, कैंटीन तथा पार्किंग स्थल के अलावा न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों, उनके स्टॉफ के रहने के लिए भवनों की व्यवस्था हो सके ।

अदालत ने राज्य सरकार को यह भी संभावना देखने को कहा है कि बरसों से ऋषिकेश में बंद पड़े आईडीपीएल के विशाल परिसर में क्या उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किया जा सकता है ।

उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव को रजिस्ट्रार की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के भी निर्देश दिए हैं । इस समिति में सदस्य के रूप में विधायी एवं संसदीय मामलों के प्रधान सचिव, गृह विभाग के प्रधान सचिव, दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं, उत्तराखंड स्टेट बार काउंसिल द्वारा नामित एक सदस्य, भारतीय बार काउंसिल के अध्यक्ष तथा एक अन्य व्यक्ति को शामिल करने को कहा गया है।

सभी पक्षों की राय लेने के बाद यह समिति सात जून तक अपनी सीलबंद रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौपेंगी । उसके बाद उच्च न्यायालय की स्थापना के लिए उपयुक्त जगह के बारे में सरकार की सिफारिशें एवं समिति के निष्कर्षों को मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा जाएगा ।

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