देश की खबरें | भारत में हर दो में से लगभग एक चिकित्सकीय नुस्खा मानक दिशा-निर्देशों से भिन्न : अध्ययन

नयी दिल्ली, 10 जुलाई भारत में हर दो में से लगभग एक चिकित्सकीय नुस्खा मानक दिशा-निर्देशों से भिन्न होता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है।

टीम ने मानक उपचार दिशानिर्देशों के अनुपालन के लिए अगस्त 2019 और अगस्त 2020 के बीच चिकित्सकों द्वारा लिखे गए 4,838 नुस्खों का विश्लेषण किया।

ये नुस्खे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा स्थापित 13 ‘रेशनल यूज ऑफ मेडिसिन सेंटर’ (आरयूएमसी) में जारी किए गए थे जो देशभर के तृतीयक देखभाल शिक्षण अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्थित हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन 475 नुस्खों को मानक दिशा-निर्देशों से भिन्न पाया गया, उनमें से 54 में पैंटोप्राजोल है जिसे सबसे अधिक बार लिखा गया था।

पैंटोप्राजोल को पेट में बनने वाले एसिड को कम करने में मदद करने के लिए जाना जाता है और यह आमतौर पर पैन 40 जैसे कई दवा नामों से उपलब्ध है। ‘इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, पैरासिटामोल और मरहम समेत अन्य दवाओं के साथ 40 मिलीग्राम पैंटोप्राजोल टैबलेट भी लिखी गई थी।

ऊपरी श्वसन पथ संक्रमण (यूआरटीआई) और उच्च रक्तचाप जैसे रोगों के लिए इन 475 नुस्खों को लिखा गया था।

शोधकर्ताओं ने कहा कि मरीजों को तर्कहीन दवाओं के नुस्खे सुझाने के परिणाम उच्च उपचार लागत और दवाओं के दुष्प्रभावों के रूप में सामने आते हैं।

उन्होंने कहा कि 55 प्रतिशत के आंकड़े के साथ ज्यादातर चिकित्सकों ने रोग-विशिष्ट आईसीएमआर दिशानिर्देशों का पालन किया।

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