देश की खबरें | तीन एनएम से छोटे एरोसोल कण जलवायु को प्रभावित करने वाले आकार तक पहुंच सकते हैं: अध्ययन

नयी दिल्ली, 11 जून भारत में एक शहरी स्थान पर 3 नैनोमीटर से छोटे एरोसोल कणों के संकेन्द्रण, आकार और विकास का पता लगाने वाले वैज्ञानिकों ने वातावरण में उप-3 एनएम एयरोसोल कणों के निर्माण होने का पता लगाया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कहा कि इसका खास महत्व है क्योंकि इन नवनिर्मित कणों का एक बड़ा अंश बादल संघनन नाभिक के आकार तक पहुंच सकता है, जिससे जलवायु पर उनका प्रभाव पड़ता है।

उप-3 एनएम आकार के छोटे आणविक समूहों के निर्माण को तकनीकी रूप से एरोसोल न्यूक्लिएशन कहा जाता है और इन नवनिर्मित समूहों के बाद में बड़े आकार में बदलने को वायुमंडलीय नव कण निर्माण (एनपीएफ) कहा जाता है।

एनपीएफ स्थलीय क्षोभमंडल में हर जगह मौजूद होता है, और इसलिए यह वायुमंडल में एरोसोल संख्या का एक बड़ा स्रोत है। फील्ड अवलोकनों, प्रयोगशाला प्रयोगों और मॉडलिंग दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए वैश्विक स्तर पर व्यापक रूप से अध्ययन किया गया है, लेकिन भारत में इसपर ज्यादा काम नहीं हुआ है।

हैदराबाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भारत में किसी शहरी स्थान पर पहली बार तटस्थ उप-3 एनएम कणों को मापा। विजय कानावडे और मैथ्यू सेबेस्शियन ने 1 से 3 एनएम की आकार सीमा में कण आकार वितरण को मापने के लिए एयरमोडस नैनो कंडेनसेशन न्यूक्लियस काउंटर (एनसीएनसी) का उपयोग किया।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम प्रभाग के तहत विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा समर्थित अध्ययन में जनवरी 2019 से हैदराबाद विश्वविद्यालय परिसर स्थल पर निरंतर अवलोकन किया और इसमें उप-3 एनएम आकार के छोटे आणविक समूहों के बनने की दर की जानकारी दी, जहां एरोसोल न्यूक्लिएशन होता है।

यह अध्ययन हाल ही में 'एमटमोस्टफेयरिक एनवायरमेंट' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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