देश की खबरें | एसआईटी की रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी : सिद्धरमैया ने वाल्मीकि निगम ‘घोटाले’ पर कहा

मैसुरु (कर्नाटक), 11 जुलाई कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित अवैध धन हस्तांतरण के संबंध में विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी और गड़बड़ी को लेकर जवाबदेही तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस घोटाले के संबंध में इस्तीफे की विपक्ष की मांग भी खारिज कर दी।

सिद्धरमैया ने यहां एक सवाल के जवाब में पत्रकारों से कहा, ‘‘तीन जांच की जा रही हैं - एक मामले की जांच बैंक की संलिप्तता के संबंध में सीबीआई कर रही है, दूसरी जांच ईडी कर रही है और तीसरी जांच एसआईटी कर रही है। एसआईटी जांच कर रही है, रिपोर्ट आने दीजिए।’’

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इतना बड़ा घोटाला मुख्यमंत्री की जानकारी के बगैर नहीं हुआ होगा, क्योंकि वह वित्त मंत्री भी है और उसने सिद्धरमैया से इस्तीफा मांगा है।

इस पर एक सवाल पूछे जाने पर सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘अगर ऐसा है, इस मामले के संबंध में बैंक में जो भी हुआ है तो फिर निर्मला सीतारमण (केंद्रीय वित्त मंत्री) को भी इस्तीफा देना चाहिए, प्रधानमंत्री को भी इस्तीफा देना चाहिए। क्या वे इस्तीफा देंगे? जांच की जा रही है, न तो प्रारंभिक और न ही अंतिम रिपोर्ट आयी है, आरोपपत्र दाखिल करने के बाद रिपोर्ट आएगी।’’

यह पूछे जाने पर कि राजकोष से निधि जारी होने पर भी क्या वित्तीय अनियमितता उनके संज्ञान में नहीं आयी, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘हर बार यह मेरे संज्ञान में नहीं आता है। अधिकारी पैसा जारी करते हैं। यह मेरे संज्ञान में नहीं आएगा और न ही मैं इस पर हस्ताक्षर करूंगा। जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। जांच पूरी हुए बिना, कैसे कुछ कहा जा सकता है? आप (मीडिया) केवल इसलिए पूछ रहे हैं कि भाजपा आरोप लगा रही है।’’

सिद्धरमैया ने कहा कि एसआईटी के रिपोर्ट सौंपने के बाद कार्रवाई की जाएगी और दोषियों पर जवाबदेही तय की जाएगी।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व आदिवासी कल्याण एवं खेल मंत्री बी. नागेंद्र और रायचूर ग्रामीण सीट से कांग्रेस विधायक बी. दद्दाल के परिसरों समेत कई स्थानों पर बुधवार से छापेमारी कर रहा है।

सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के करीब 20 स्थानों पर छापे मारे। ईडी ने यह कार्रवाई धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में की।

इस बीच, उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने बेंगलुरु में कहा कि ईडी के छापों की जरूरत नहीं है क्योंकि एसआईटी पहले ही छापेमारी कर चुकी है और कुछ पैसा बरामद कर चुकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘सीबीआई के पास यह प्रावधान है कि अगर कुछ धनराशि को लेकर अनियमितता हो तो वे उस पर विचार कर सकते हैं। ईडी को इसमें शामिल होने की जरूरत नहीं है। किसी ने ईडी को कोई शिकायत नहीं दी थी...एक व्यवस्था है, वे महज इसलिए जांच शुरू नहीं कर सकते कि किसी ने कुछ कहा है।’’

शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने खुद जांच एसआईटी को सौंप दी है। वे जांच कर रहे हैं और उन्होंने एक मामले के संबंध में कुछ लोगों को नोटिस भेजा है।

यह पूछने पर कि क्या ईडी के छापे राजनीति से प्रेरित हैं, इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘इसे (छापेमारी) पूरा होने दीजिए, हम बाद में बात करेंगे।’’

निगम से संबंधित अवैध धन हस्तांतरण का मामला तब प्रकाश में आया जब इसके लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी ने 26 मई को आत्महत्या कर ली।

सुसाइड नोट में चंद्रशेखरन ने आरोप लगाया कि सरकारी निगम के बैंक खाते से 187 करोड़ रुपये का अनधिकृत हस्तांतरण किया गया। इसके अलावा, कुछ आईटी कंपनियों और हैदराबाद स्थित एक सहकारी बैंक के विभिन्न खातों में 88.62 करोड़ रुपये अवैध रूप से जमा किए गए।

राज्य सरकार ने इसकी जांच के लिए आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) में आर्थिक अपराध मामलों के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मनीष खरबीकर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

‘यूनियन बैंक ऑफ इंडिया’ ने भी धन के अवैध हस्तांतरण के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद सीबीआई भी मामले की जांच कर रही है।

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