90 अरब डॉलर से हो सकता है 70 करोड़ गरीबों का महामारी से बचाव : संरा

संयुक्तराष्ट्र के मानवीय मामले और आपदा राहत समन्वय विभाग के महासचिव लोकॉक ने सोमवार को विशेषज्ञों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में यह बात कही।

दुनिया के 20 सबसे अमीर देशों ने वैश्विक अर्थव्यस्था को बचाने के लिए जिस 8,000 अरब डॉलर के राहत पैकेज की घोषणा की है, यह राशि उसका करीब एक प्रतिशत है। इतनी ही राशि से इन गरीब लोगों की आय, खाने और स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है।

संयुक्तराष्ट्र के मानवीय मामले और आपदा राहत समन्वय विभाग के महासचिव लोकॉक ने सोमवार को विशेषज्ञों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में यह बात कही।

विशेषज्ञों ने माना कि कोरोना वायरस महामारी दुनिया के सबसे गरीब क्षेत्रों में अभी चरम पर नहीं है, लेकिन अगले तीन से छह महीने में यह वहां पहुंच सकती है।

लोकॉक ने कहा कि वैश्विक आबादी का करीब 10 प्रतिशत यानी लगभग 70 करोड़ लोग उन 30 से 40 देशों में रहते हैं जिन्हें पहले से मानवीय मदद मिल रही है। लेकिन कोरोना वायरस की वजह से सरकारों ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं जिसमें लॉकडाउन (बंद) भी शामिल हैं। इससे गरीबों की आय में बड़ी गिरावट आएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि इन लोगों की आय में गिरावट को रोकना है तो करीब 60 अरब डॉलर की राशि से इसे किया जा सकता है।’’

वहीं कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए इनको उपलब्ध करायी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के वित्त पोषण और भुखमरी का सामना कर रहे लोगों को खाना उपलब्ध कराने पर 30 अरब डॉलर का खर्च आएगा।

लोकॉक ने कहा कि इस 90 अरब डॉलर का करीब दो-तिहाई विश्वबैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे वैश्विक संस्थानों से मिल सकते हैं। बस उन्हें अपने सहायता देने के नियमों को बदलना होगा।

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