देश की खबरें | गुजराती साप्ताहिक पत्रिका ‘चित्रलेखा’ के 75 साल पूरे: शाह ने समाज के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की

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मुंबई, 12 अप्रैल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि केवल पवित्र उद्देश्य, साहित्य के प्रति समर्पण और समाज की समस्याओं को हल करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित पत्रिका ही लोकप्रिय गुजराती साप्ताहिक ‘चित्रलेखा’ की तरह अपने पाठकों के साथ जुड़ाव बनाए रख सकती है।

साप्ताहिक पत्रिका की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि एक जागृत पत्रिका का समाज पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है।

शाह ने कहा कि साहित्यिक यात्रा को जारी रखने तथा अंग्रेजी के प्रभाव वाले इस युग में गुजराती साहित्य को जीवंत रखने के लिए ‘चित्रलेखा’ की आवश्यकता आज उस समय से कहीं अधिक है, जब 1950 में वाजू कोटक ने इसकी स्थापना की थी।

शाह ने कहा, ‘‘पाठकों के साथ ऐसा जुड़ाव बनाए रखना मुश्किल से ही संभव होता है। यह तभी संभव है जब फायदे की कोई सोच न हो, उद्देश्य की पवित्रता हो, साहित्य के प्रति समर्पण हो और समाज की समस्याओं को सुलझाने की इच्छा हो। और यह सब कुछ ‘चित्रलेखा’ में है।’’

उन्होंने कहा कि अपने अस्तित्व के 75 वर्षों में ‘चित्रलेखा’ ने गुजरात के साहित्य, सामाजिक जीवन और समस्याओं के साथ-साथ देश और समाज को भी प्रतिबिंबित किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘समाज की सभी समस्याओं को निर्भीकता से चित्रित करना और न केवल सवाल उठाना बल्कि समाधान के सुझाव भी देना है... मुझे अच्छी तरह याद है कि गुजरात में आरक्षण आंदोलन के दौरान जब समाज में उथल-पुथल मची हुई थी, तब ‘चित्रलेखा’ ने समाज को एकजुट करने की मशाल थामी थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘समाज के सहयोग के बिना साहित्य कभी प्रगति नहीं कर सकता। गुजराती पत्रिकाओं को जीवंत बनाये रखना गुजरात के लोगों, लाखों पाठकों की जिम्मेदारी है।’’

शाह ने कहा कि उन्होंने कई बदलाव देखे हैं लेकिन एक पहलू जो स्थिर रहा, वह है ‘चित्रलेखा’ का अपने निरंतर प्रयासों से बेजोड़ विश्वसनीयता को बनाये रखना।’’

शाह ने ‘बुद्धि प्रकाश’, ‘सत्य विहार’ और ‘नव जीवन’ का उदाहरण देते हुए कहा कि गुजराती पत्रिकाओं ने राष्ट्र निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई है।

चित्रलेखा के स्तंभकार, हास्य लेखक और नाटककार तारक मेहता की प्रशंसा करते हुए शाह ने कहा कि उनसे मिलने के बाद सबसे नीरस व्यक्ति भी हंसने लग जाता था।

शाह ने कहा, ‘‘तारकभाई सिर्फ चार पृष्ठों में सभी गुजरातियों को उनके दुख भुला देते थे। उन्होंने लोगों को हंसाया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए अपने जीवन से ऊपर उठकर काम किया कि समाज अपने दुखों को भूल जाए। लंबे समय तक तारक भाई ने चित्रलेखा के माध्यम से ऐसा किया।’’

केंद्रीय गृह मंत्री ने चित्रलेखा के कई विशेष संस्करणों को याद किया, विशेष रूप से नर्मदा परियोजना, 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों और अयोध्या में राम मंदिर पर केंद्रित अंकों को।

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